EPISODE · Jul 11, 2022 · 2 MIN
दूसरों की सेवा करने में हमारी सेवा होती है/Served in Serving Others
from मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan · host मार्ग सत्य जीवन
दूसरों की सेवा करने में हमारी सेवा होती है। Served in Serving Others यीशु ने उनसे कहा, “तुम इस सोच - विचार में क्यों पड़ गए कि तुम्हारे पास रोटी नहीं है? क्या तुम अब तक नहीं देखते या नहीं समझते? क्या तुम्हारा मन कठोर नहीं हो गया है?” (मरकुस 8:17) जब यीशु ने कुछ रोटी और कुछ मछली से पाँच हजार तथा चार हजार लोगों को खिलाया, उसके पश्चात् शिष्यगण स्वयं के लिए पर्याप्त रोटी के बिना ही नाव में सवार हो गए। जब वे अपनी विकट स्थिति के विषय में बात-चीत कर रहे थे, तो यीशु ने उनसे कहा, “तुम इस सोच - विचार में क्यों पड़ गए कि तुम्हारे पास रोटी नहीं है? क्या तुम अब तक नहीं देखते या नहीं समझते?” (मरकुस 8:17)। उन्हें क्या समझ में नहीं आया? वे शेष बची हुई टोकरियों का अर्थ नहीं समझे, अर्थात्, जब वे दूसरों की चिन्ता करेंगे तो यीशु उनकी चिन्ता करेगा। यीशु कहते हैं,
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