EPISODE · May 14, 2020 · 25 MIN
द्वितीय अध्याय भाग 20 कर्मण्येवाधिकारस्ते श्लोक की सुंदर विस्तृत विवेचना कर्म योग का उपदेश
from Asha Ki Kiran · host Kiran Acharya
द्वितीय अध्याय की भाग संख्या 20 श्लोक 47 एवं 48 में श्री कृष्ण अर्जुन को बता रहे है कि कर्म के महत्व को बतला कर कहते हैं कि कर्म करना मनुष्य की कर्तव्य है अतः बिना आ सकती मोह ममता के कर्म करना चाहिए।
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द्वितीय अध्याय की भाग संख्या 20 श्लोक 47 एवं 48 में श्री कृष्ण अर्जुन को बता रहे है कि कर्म के महत्व को बतला कर कहते हैं कि कर्म करना मनुष्य की कर्तव्य है अतः बिना आ सकती मोह ममता के कर्म करना चाहिए।
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द्वितीय अध्याय भाग 20 कर्मण्येवाधिकारस्ते श्लोक की सुंदर विस्तृत विवेचना कर्म योग का उपदेश
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