EPISODE · Feb 1, 2025 · 1 MIN
Ek Samay Tha | Raghuvir Sahay
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
एक समय था- रघुवीर सहायएक समय था मैं बताता था कितनानष्ट हो गया है अब मेरा पूरा समाजतब मुझे ज्ञात था कि लोग अभी व्यग्न हैंबनाने को फिर अपना परसों कल और आजआज पतन की दिशा बताने पर शक्तिवानकरते हैं कोलाहल तोड़ दो तोड़ दोतोड़ दो झोंपड़ी जो खड़ी है अधबनीफ़िज़ूल था बनाना ज़िद समता की छोड़ दोएक दूसरा समाज बलवान लोगों काआज बनाना ही पुनर्निर्माण हैजिनका अधिकार छीन जिन्हें किया पराधीनउनको जी लेने का मिलता प्रतिदान है।
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एक समय था- रघुवीर सहायएक समय था मैं बताता था कितनानष्ट हो गया है अब मेरा पूरा समाजतब मुझे ज्ञात था कि लोग अभी व्यग्न हैंबनाने को फिर अपना परसों कल और आजआज पतन की दिशा बताने पर शक्तिवानकरते हैं कोलाहल तोड़ दो तोड़ दोतोड़ दो झोंपड़ी जो खड़ी है अधबनीफ़िज़ूल था बनाना ज़िद समता की छोड़ दोएक दूसरा समाज बलवान लोगों काआज बनाना ही पुनर्निर्माण हैजिनका अधिकार छीन जिन्हें किया पराधीनउनको जी लेने का मिलता प्रतिदान है।
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Ek Samay Tha | Raghuvir Sahay
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