EPISODE · Dec 26, 2023 · 58 MIN
Ep. - 286 अध्याय 2 अर्जुन ने श्री कृष्ण की शरण ली का सार
from सरल भगवद् गीता || Bhagavad Gita Simplifed (Saral Bhagavad Gita by Golok Express) · host Team Golok Express
अर्जुन भगवान को अपना गुरु मान कर आत्म समर्पण करता है और उन्हें मार्गदर्शन करने के लिए कहता है। भगवान कृष्ण सबसे पहला उपदेश आत्मा के ज्ञान का देते हैं। मुक्ति के योग्य वही होगा जो सुखों दुखों में समभाव रहेगा। हमें अपने कर्तव्य पालन में शोक नहीं करना चाहिए सारे कर्तव्य खुशी से निभाना चाहिए प्रभु की सेवा समझते हुए। कर्तव्य पालन चाहे फल की इच्छा से ही क्यों ना किया जाए कर्म न करने से बेहतर है यहां प्रभु ने हमें कर्म योग समझाया है। कर्तव्य पालन फल की इच्छा से रहित व सम होकर करना ही योग कहलाता है भाव प्रभु और आत्मा के बारे में समझ कर उनसे जुड़ना इस तरह से जो अपने प्रत्येक कर्म को निष्काम भाव से करेगा वह पापों से मुक्त हो जाएगा। दुनियादारी के प्रति आसक्त व्यक्ति कभी भक्ति मार्ग में प्रगति नहीं कर सकते ।यह संसार दुखालय है ।हमें प्रभु से उनका प्रेम मांगना चाहिए ना की चीजें। संसार को भोगने की कोशिश करने वाले कृपण हो जाते हैं ,परेशान रहेंगे लेकिन जितना वह इच्छाओं के पीछे नहीं भागेंगे उतना ही उनका मन आनंदित रह पाएगा। हमें पाप और पुण्य सुख-दुख के रूप में मिलते हैं और यदि हम दिव्य कर्म करते हैं तो वह हमें भगवान के धाम में लेकर जाते हैं। निमित्त मात्र के भाव से जो अपना प्रत्येक कर्म प्रभु के लिए करता है वह आनंदित इसी जीवन में हो जाता है।आगे कछुआ की उधारण हमें सिखाता है अपनी इंद्रियों को वश में कैसे रखा जाए। जो ईश्वर के प्रेम रस में खो जाते हैं उनके मन की अभिलाषाएं धीरे-धीरे स्वयं ही खत्म होती जाती है। उन्हें छोड़ना नहीं पड़ता बुरी आदतें स्वत छूट जाती है। क्रोध किस प्रकार आता है कामनाओं के चिंतन के कारण। हमें चिंतन प्रभु का करना है सांसारिक इच्छाएं घट जाएंगी और प्रभु को पाने की इच्छाएं बढ़ेगी धीरे-धीरे क्रोध अपने आप कम होता जाएगा। प्रभु की भक्ति के बिना व्यक्ति को आंतरिक शांति और सुख कभी भी नहीं मिल सकता। भक्ति मार्ग में चल रहे लोगों के जीने का तरीका दुनियादारी के लोगों के जीवन से विपरीत हो जाता है। अपनी हर एक इच्छा को पूरी करने के पीछे जो भागेगा वह कभी शांति और सुख को प्राप्त नहीं कर सकता। इच्छाएं वही पूरी करें जो हमें प्रभु से जोड़ती हैं जो उनसे दूर करती हैं उन इच्छाओं को भूल जाना ही हमारी भलाई है। आइए फ्रेंड्स निखिल जी की इस audio के माध्यम से समझते अध्याय दो के सार को सदेव जपे और दुसरो को जपने के लिए प्रेरित करे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏🙏 To watch this Episode on Youtube click on the link below : https://www.youtube.com/live/EeJ5JlJwDgI?si=3Jd6z0TxpU72pXri To watch GolokExpress videos click on the link below : Youtube_GolokExpress To get in touch with GolokExpress on telegram click the link below : Telegram_GolokExpress To get in touch with GolokExpress on facebook click the link below : Facebook_GolokExpress To get in touch -Whatsapp/Telegram- 7018026821 or [email protected]
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