EPISODE · Nov 5, 2023 · 31 MIN
Ep 71 Aranya Kand | Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
from SANATAN SANSKRITI · host Ashish P Mishra
श्री रामचरित मानस भाग – 71 / सूपर्णखा की नाक कटना व खरदूषण वध | इस अंक में हम में हम सुनेंगे किस तरह सूपर्णखा ने श्री राम लक्षमण से प्रेम प्रस्ताव रखा , किस तरह लक्ष्मण जी ने उसके नाक और कान काटे और फिर खर दूषण का वध श्री राम ने किया | अरण्य कांड में हम जानेंगे की , चित्रकूट में रहने के कुछ समय पश्चात श्री राम ने चित्रकूट से प्रयाण किया तथा वे अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे। अत्रि ने राम की स्तुति की और उनकी पत्नी अनसूयजी ने सीता जी को पातिव्रत धर्म के मर्म समझाये। वहां से फिर राम ने आगे प्रस्थान किया और शरभंग मुनि से भेंट की। शरभंग मुनि केवल राम के दर्शन की कामना से वहां निवास कर रहे थे अतः राम के दर्शनों की अपनी अभिलाषा पूर्ण हो जाने से योगाग्नि से अपने शरीर को जला डाला और ब्रह्मलोक को गमन किया। और आगे बढ़ने पर राम को स्थान स्थान पर हड्डियों के ढेर दिखाई पड़े जिनके विषय में मुनियों ने राम को बताया कि राक्षसों ने अनेक मुनियों को खा डाला है और उन्हीं मुनियों की हड्डियां हैं। इस पर राम ने प्रतिज्ञा की कि वे समस्त राक्षसों का वध करके पृथ्वी को राक्षस विहीन कर देंगे। राम और आगे बढ़े और पथ में सुतीक्ष्ण, अगस्त्य आदि ऋषियों से भेंट करते हुए दण्डक वन में प्रवेश किया जहां पर उनकी भेंट जटायु से हुई। राम ने पंचवटी को अपना निवास स्थान बनाया। पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा ने आकर श्री राम से प्रणय निवेदन-किया। श्री राम ने यह कह कर कि वे अपनी पत्नी के साथ हैं और उनका छोटा भाई अकेला है उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण ने उसके प्रणय-निवेदन को अस्वीकार करते हुए शत्रु की बहन जान कर उसके नाक और कान काट लिये। शूर्पणखा ने खर-दूषण से सहायता की मांग की और वह अपनी सेना के साथ लड़ने के लिये आ गया। लड़ाई में राम ने खर-दूषण और उसकी सेना का संहार कर डाला। शूर्पणखा ने जाकर अपने भाई रावण से शिकायत की। रावण ने बदला लेने के लिये मारीच को स्वर्णमृग बना कर भेजा जिसकी छाल की मांग सीता जी ने श्री राम से की। लक्ष्मण को सीता के रक्षा की आज्ञा दे कर राम स्वर्णमृग रूपी मारीच को मारने के लिये उसके पीछे चले गये। मारीच श्री राम के हाथों मारा गया पर मरते मरते मारीच ने श्री राम की आवाज बना कर 'हे लक्ष्मण' का क्रन्दन किया जिसे सुन कर सीता जी ने आशंकावश होकर लक्ष्मण को श्री राम के पास भेज दिया। लक्ष्मण के जाने के बाद अकेली सीता जी का रावण ने छलपूर्वक हरण कर लिया और अपने साथ लंका ले गया। रास्ते में जटायु ने सीता को बचाने के लिये रावण से युद्ध किया और रावण ने उसके पंख काटकर उसे अधमरा कर दिया। सीता जी को न पा कर श्री राम अत्यंत दुखी हुए और विलाप करने लगे। रास्ते में जटायु से भेंट होने पर उसने श्री राम को रावण के द्वारा अपनी दुर्दशा होने व सीता जी को हर कर दक्षिण दिशा की ओर ले जाने की बात बताई। ये सब बताने के बाद जटायु ने अपने प्राण त्याग दिये और राम उसका अंतिम संस्कार करके सीता जी की खोज में सघन वन के भीतर आगे बढ़े। रास्ते में श्री राम ने दुर्वासा के शाप के कारण राक्षस बने गन्धर्व कबन्ध का वध करके उसका उद्धार किया और शबरी के आश्रम जा पहुंचे जहां पर कि उसके द्वारा दिये गये जूठे बेरों को उसके भक्ति के वश में होकर खाया| इस प्रकार श्री राम सीता जी की खोज में सघन वन के अंदर आगे बढ़ते गये। आइये आप और हम मिल कर आरम्भ करते हैं श्री रामचरितमानस का पाठ | जय श्री राम | Ashish P Mishra facebook Id : https://www.facebook.com/filmmakerashishpmishra Jai Shri Ram | #ramcharitmanas #shriramcharitmanas #shriram #ramji #ramayan #ramkatha #tulsiramayan #Ayodhyakand #jaishriram
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