EPISODE · Nov 9, 2025 · 2 MIN
Ghar Mein Waapsi | Dhoomil
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
घर में वापसी । धूमिलमेरे घर में पाँच जोड़ी आँखें हैंमाँ की आँखें पड़ाव से पहले हीतीर्थ-यात्रा की बस केदो पंचर पहिए हैं।पिता की आँखें—लोहसाँय की ठंडी सलाख़ें हैंबेटी की आँखें मंदिर में दीवट परजलते घी केदो दिए हैं।पत्नी की आँखें आँखें नहींहाथ हैं, जो मुझे थामे हुए हैंवैसे हम स्वजन हैं, क़रीब हैंबीच की दीवार के दोनों ओरक्योंकि हम पेशेवर ग़रीब हैं।रिश्ते हैं; लेकिन खुलते नहीं हैंऔर हम अपने ख़ून में इतना भी लोहानहीं पाते,कि हम उससे एक ताली बनवातेऔर भाषा के भुन्ना-सी ताले को खोलतेरिश्तों को सोचते हुएआपस में प्यार से बोलते,कहते कि ये पिता हैं,यह प्यारी माँ है, यह मेरी बेटी हैपत्नी को थोड़ा अलगकरते - तू मेरीहमसफ़र है,हम थोड़ा जोखिम उठातेदीवार पर हाथ रखते और कहतेयह मेरा घर है।
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