EPISODE · Jan 21, 2025 · 1 MIN
Ghisi Pencil | Raghuvir Sahay
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
घिसी पेंसिल | रघुवीर सहाय फिर रात आ रही है।फिर वक्त आ रहा है।जब नींद दुःख दिन कोसंपूर्ण कर चलेंगेएकांत उपस्थत हो, 'सोने चलो' कहेगाक्या चीज़ दे रही है यह शांति इस घड़ी में ?एकांत या कि बिस्तर या फिर थकान मेरी ?या एक मुड़े कागज़ पर एक घिसी पेंसिलतकिये तले दबाकर जिसको कि सो गया हूँ ?
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घिसी पेंसिल | रघुवीर सहाय फिर रात आ रही है।फिर वक्त आ रहा है।जब नींद दुःख दिन कोसंपूर्ण कर चलेंगेएकांत उपस्थत हो, 'सोने चलो' कहेगाक्या चीज़ दे रही है यह शांति इस घड़ी में ?एकांत या कि बिस्तर या फिर थकान मेरी ?या एक मुड़े कागज़ पर एक घिसी पेंसिलतकिये तले दबाकर जिसको कि सो गया हूँ ?
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Ghisi Pencil | Raghuvir Sahay
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