EPISODE · Sep 18, 2022 · 25 MIN
गुल्लू आतिशबाज़ | स्टोरीबॉक्स | Ep 02
from Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui · host Aaj Tak Radio
मोहल्ले के नुक्कड़ पर वो बोसीदा सी पुरानी दुकान जिसके एक तरफ को झुके हुए ज़ंग-आलूदा बोर्ड पर लिखा था - महबूब आतिशबाज़। कहते थे कि जब देश आज़ाद हुआ तो लाल क़िले पर आतिशबाज़ी के लिए महबूब भाई को बुलाया गया था। लेकिन वो दौर दूसरा था, अब तो महबूब भाई के पोते गुल्लू आतिशबाज़ उस उज़ड़ी हुई दुकान में कुछ पटाखों के साथ बैठे रहते थे। कभी-कबार किसी शादी-बारात में आतिशबाज़ी का ऑर्डर मिल गया तो मिल गया वरना वो भी नहीं। लेकिन हां, पिछले कुछ दिनों से गुल्लू साहब की दुकान से कुछ रॉकेट सुरसुराते हुए आसमान में जाते और वली अहमद साहब के मकान के ऊपर जाकर रौशनी में बिखरते हुए दिल बन जाते। और ये देखकर बालकनी पर एक मोहतरमा मुस्कुरा देतीं, कौन थीं वो मोहतरमा, सुनिए स्टोरीबॉक्स में इस हफ़्ते की कहानी - गुल्लू आतिशबाज़, जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
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