EPISODE · Mar 14, 2025 · 3 MIN
Hajamat | Anup Sethi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
हजामत | अनूप सेठी सैलून की कुर्सी पर बैठे हुएकान के पीछे उस्तरा चला तो सिहरन हुईआइने में देखा बाबा नेसाठ-पैंसठ साल पहले भीकान के पीछे गुदगुदी हुई थीपिता ने कंधे से थाम लिया थाआइने में देखा बाबा नेपीछे बैंच पर अधेड़ बेटा पत्रिकाएँ पलटता हुआ बैठा हैचालीस साल पहले यह भी उस्तरे की सरसराहट से बिदका थाबाबा ने देखा आइने मेंइकतालीस साल पहले जब पत्नी को पहली बारब्याह के बाद गाँव में घास की गड्डी उठाकर लाते देखा थाहरी कोमल झालर मुँह को छूकर गुज़री थीजैसे नाई ने पानी का फुहारा छोड़ा हो अचानकतीस साल पहले जब बेटी विदा हुई थीउसने कूक मारी थी ज़ोर से आँखें भर आईं थींऔर नाई ने पौंछ दीं रौंएदार तौलिए सेपाँच साल पहले पत्नी की देह को आग दीआँखें सूखी रहीं, गर्दन भीग गई थीजैसे बालों के टुकड़े चिपके हुए चुभने लगते हैंबाबा के हाथ नहीं पँहुचे गर्दन तक आँखों पर या कान के पीछेबेटा पत्रिका में खोया हुआ हैआइने में दुगनी दूर दिखता हैनाई कम्बख़्त देर बहुत लगाता हैहड़बड़ा कर आख़िरी बार आइने को देखा बाबा नेउठते हुए सीढ़ी से उतरते वक़्त बेटे ने कंधे को हौले से थामाबाबा ने खुली हवा में साँस लीआसमान ज़रा धुंधला थाआइने बड़ा भरमाते हैंउस्तरा भी कहाँ से कहाँ चला जाता हैसाठ पैंसठ साल से हर बार बाबा सोचते हैंइस बार दिल जकड़ के जाऊंगा नाई के पासपाँच के हों या पिचहत्तर बरस के बाबाबड़ा दुष्कर है हजामत बनवाना
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Hajamat | Anup Sethi
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