EPISODE · Jul 14, 2022 · 2 MIN
हमारा सेवक, यीशु/Our Servant, Jesus.
from मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan · host मार्ग सत्य जीवन
हमारा सेवक, यीशु Our Servant, Jesus. मनुष्य का पुत्र भी अपनी सेवा कराने नहीं वरन् सेवा करने और बहुतों की फिरौती के मूल्य में प्राण देने आया।” (मरकुस 10:45) न केवल वह पृथ्वी पर रहते समय अपने लोगों का सेवक था, किन्तु वह उस समय भी हमारा सेवक होगा जब वह इस संसार में पुनः आएगा। “मैं तुमसे सच सच कहता हूँ कि वह अपनी कमर कसकर उनकी सेवा करेगा और उन्हें भोजन करने बैठाएगा और स्वयं आकर परोसेगा” (लूका 12:37)। यीशु ने इसे एक चित्रण के रूप में हमें दिखाया है कि वह अपने पुनः आगमन पर क्या करेगा। केवल इतना ही नहीं किन्तु वह अब भी हमारा सेवक है। “मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा और न ही कभी त्यागूँगा।’ अतः हम साहसपूर्वक कह सकते हैं, “प्रभु मेरा सहायक है, मैं नहीं डरूँगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?’” (इब्रानियों 13:5-6) क्या यह विचार जी उठे यीशु के मूल्य को कम करता है — कि वह अपने लोगों का सेवक था और है तथा सर्वदा रहेगा? यह यीशु के मूल्य को तब कम करता, यदि “सेवक” का अर्थ केवल यह होता “वह जो आदेशों को ग्रहण करता है,” अथवा यदि हम यह सोचते कि हम उसके स्वामी हैं। हाँ, यह बात उसका अनादर करती। किन्तु यह कहना उसका अनादर करना नहीं है कि हम निर्बल हैं और हमें उसकी सहायता की आवश्यकता है।
Embed this episode
NOW PLAYING
हमारा सेवक, यीशु/Our Servant, Jesus.
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.