Ho Sakta Hai | Ashok Vajpeyi episode artwork

EPISODE · May 17, 2023 · 2 MIN

Ho Sakta Hai | Ashok Vajpeyi

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

हो सकता है - अशोक वाजपेयी हो सकता है, इस बार हम असमय आ गए होंहर समय कुछ ना कुछ काअंत हो रहा होता हैऔर उसी समयकुछ ना कुछ का आरंभ भीऐसा लग सकता है किअंत ही आरंभ हैऔर आरंभ ही अंत हैठीक-ठीक समय तय कर पाना मुश्किल हैक्योंकि हर आना अंत है, आरंभ भीजब मनुष्य अपने एकांत में विलप रहा होता है,तब हरितिमा बाहरखिलखिला रही होती हैफूलों को कतई ख़बर नहींकि मनुष्य के आंसू क्या होते हैंप्रकृति ना हँसती है ना रोती हैफिर भी माटी का चोला पहने मनुष्यउसपर भरोसा करता हैजबकि जीना हर दिनअंत के और पास जाना हैनष्ट करने का उत्साह बढ़ता जाता हैकम होती जाती हैइच्छा कुछ रचने कीकम होती जाती हैं जगहेंठिठककर कुछ सोचने कीजो नष्ट करता है, वो अपने को भीनष्ट कर रहा होता हैजो रचता है, वो अपने को बचा रहा होता हैभुरभुरा है नाश का स्थापत्यभुरभुरा है रचने का स्थापत्यकोई नहीं बचता नश्वरता के श्राप सेखिड़कियाँ और दरवाज़े सब खुले हैंखुला है आंगनउन्हीं में होकर आती है पदचापना होने कीहम उसी पदचाप की ओर आपका ध्यान खींचने  शायद असमय आ गए हैं।

हो सकता है - अशोक वाजपेयी हो सकता है, इस बार हम असमय आ गए होंहर समय कुछ ना कुछ काअंत हो रहा होता हैऔर उसी समयकुछ ना कुछ का आरंभ भीऐसा लग सकता है किअंत ही आरंभ हैऔर आरंभ ही अंत हैठीक-ठीक समय तय कर पाना मुश्किल हैक्योंकि हर आना अंत है, आरंभ भीजब मनुष्य अपने एकांत में विलप रहा होता है,तब हरितिमा बाहरखिलखिला रही होती हैफूलों को कतई ख़बर नहींकि मनुष्य के आंसू क्या होते हैंप्रकृति ना हँसती है ना रोती हैफिर भी माटी का चोला पहने मनुष्यउसपर भरोसा करता हैजबकि जीना हर दिनअंत के और पास जाना हैनष्ट करने का उत्साह बढ़ता जाता हैकम होती जाती हैइच्छा कुछ रचने कीकम होती जाती हैं जगहेंठिठककर कुछ सोचने कीजो नष्ट करता है, वो अपने को भीनष्ट कर रहा होता हैजो रचता है, वो अपने को बचा रहा होता हैभुरभुरा है नाश का स्थापत्यभुरभुरा है रचने का स्थापत्यकोई नहीं बचता नश्वरता के श्राप सेखिड़कियाँ और दरवाज़े सब खुले हैंखुला है आंगनउन्हीं में होकर आती है पदचापना होने कीहम उसी पदचाप की ओर आपका ध्यान खींचने  शायद असमय आ गए हैं।

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Ho Sakta Hai | Ashok Vajpeyi

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How long is this episode of Pratidin Ek Kavita?

This episode is 2 minutes long.

When was this Pratidin Ek Kavita episode published?

This episode was published on May 17, 2023.

What is this episode about?

हो सकता है - अशोक वाजपेयी हो सकता है, इस बार हम असमय आ गए होंहर समय कुछ ना कुछ काअंत हो रहा होता हैऔर उसी समयकुछ ना कुछ का आरंभ भीऐसा लग सकता है किअंत ही आरंभ हैऔर आरंभ ही अंत हैठीक-ठीक समय तय कर पाना मुश्किल हैक्योंकि हर आना अंत है, आरंभ भीजब...

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