EPISODE · Oct 18, 2023 · 0 MIN
हुस्न का सरापा husn ka sarapa حسن کا سراپا Episode 79
from POEM HUB
Here’s an episode that will keep you waiting for the next one. Tune in ज़ुल्फ तुम्हारी सुमबुल जैसी , तुम लगती हो बुलबुल जैसी , उफ ये आंखें लगें शराबी , उस पर से ये हांथ गुलाबी , कितना दिलकश गोरा मुखड़ा , जैसे कोई चांद का टुकड़ा , तुम जो बोलो बजे हैं साज , कोयल जैसी है आवाज़ , कितने भले हैं कान तुम्हारे , उस पर लटके झुमके प्यारे , पतली गर्दन जैसे सुराही , और ये सीना एक तबाही , जिस्म तुम्हारा मरमर जैसा , महक रहा है अंबर जैसा , प
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