EPISODE · Mar 20, 2024 · 19 MIN
ईशा उपनिषद; हर दुख से मुक्ति का मार्ग, मंत्र 01
from Gita For Life · host Kamlesh Chandra
ईशा उपनिषद का पहला मंत्र है:"ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत् |तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ||"इस मंत्र का अर्थ है कि समस्त जगत, जो कुछ भी इस जगत में है, वह सब ईश्वर से आच्छादित है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह ईश्वर द्वारा आच्छादित इस जगत में रहते हुए भी लालच से मुक्त रहे और ईश्वर द्वारा नियत की गई चीजों का ही भोग करे, न कि किसी और के धन का लोभ करे।इस मंत्र के माध्यम से यह सिखाया गया है कि सब कुछ ईश्वर का है, और हमें जीवन में जो भी मिलता है, उसे ईश्वर का दिया हुआ समझकर स्वीकार करना चाहिए। लालच और मोह से मुक्त रहकर ही मनुष्य सच्चे सुख और शांति को प्राप्त कर सकता है। यह मंत्र हमें आत्मसंयम और संतोष का मार्ग दिखाता है, जो कि दुखों से मुक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है।Support the showAll by the grace of Guru ji, Brahmleen Sant Samvit Somgiri Ji Maharaj.
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ईशा उपनिषद; हर दुख से मुक्ति का मार्ग, मंत्र 01
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