EPISODE · Feb 6, 2024 · 1 MIN
In Sardiyon Mein | Manglesh Dabral
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
इन सर्दियों में | मंगलेश डबरालपिछली सर्दियाँ बहुत कठिन थींउन्हें याद करने पर मैं इन सर्दियों में भी सिहरता हूँ हालाँकि इस बार दिन उतने कठोर नहींपिछली सर्दियों में मेरी माँ चली गई थीमुझसे एक प्रेमपत्र खो गया था एक नौकरी छूट गई थी रातों को पता नहीं कहाँ-कहाँ भटकता रहा कहाँ-कहाँ करता रहा टेलीफ़ोन पिछली सर्दियों में मेरी ही चीजें गिरती थीं मुझ परइन सर्दियों में पिछली सर्दियों के कपड़े निकालता हूँ कंबल टोपी मोजे मफ़लर उन्हें ग़ौर से देखता हूँ सोचता हुआ पिछला समय बीत गया है ये सर्दियाँ क्यों होंगी मेरे लिए पहले जैसी कठोर।
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इन सर्दियों में | मंगलेश डबरालपिछली सर्दियाँ बहुत कठिन थींउन्हें याद करने पर मैं इन सर्दियों में भी सिहरता हूँ हालाँकि इस बार दिन उतने कठोर नहींपिछली सर्दियों में मेरी माँ चली गई थीमुझसे एक प्रेमपत्र खो गया था एक नौकरी छूट गई थी रातों को पता नहीं कहाँ-कहाँ भटकता रहा कहाँ-कहाँ करता रहा टेलीफ़ोन पिछली सर्दियों में मेरी ही चीजें गिरती थीं मुझ परइन सर्दियों में पिछली सर्दियों के कपड़े निकालता हूँ कंबल टोपी मोजे मफ़लर उन्हें ग़ौर से देखता हूँ सोचता हुआ पिछला समय बीत गया है ये सर्दियाँ क्यों होंगी मेरे लिए पहले जैसी कठोर।
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In Sardiyon Mein | Manglesh Dabral
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