EPISODE · Oct 17, 2023 · 2 MIN
Ishwar Ke Saamne Nirvastra | Shraddha Upadhyay
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ईश्वर के सामने निर्वस्त्र | श्रद्धा उपाध्यायतांबे के ईश्वर सपरिवारजिनको मैंने अमेजन से खरीदामेरी किताबों के आगे स्थापितएक बुझे हुए दीपक के पीछेउन पर समर्पित पुष्प, न ताज़े, न सूखेमेरे साथ रहते हैंमेरे एकाकी एक कमरे के अस्तित्व मेंसामान्यतः न पूजेlकभी कभी न सुमिरेफिर भी रहते हैं सुस्त साथी की तरहऔर कुछ दिन मैं देखती हूंमुझे देखते हुएनिर्वस्त्रकपड़े पहनने से पहलेकपड़े उतारने के बादमैं लजा जाती हूँक्या मैं उन्हें ले जाऊंअपने रहवासे सेकिसी पूजाघर मेंऔर राम को क्या अर्पण करूंकाया जो मैं रोज़ पहनती हूंकाया जिसमें उसको वनवास नहीं हो सकता
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Ishwar Ke Saamne Nirvastra | Shraddha Upadhyay
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