EPISODE · May 1, 2024 · 2 MIN
Jeevan Nahi Mara Karta Hai | Gopaldas Neeraj
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
जीवन नहीं मारा करता है | गोपालदस नीरज छिप छिप अंश्रु बहाने वालों,मोती व्यर्थ लुटाने वालोंकुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।सपना क्या है, नयन सेज परसोया हुया आँख का पानीऔर टूटना है उसको ज्योंजागे कच्ची नींद जवानीगीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालोंकुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।माला बिखर गई तो क्या है,खुद ही हल हो गयी समस्याआंसू गर नीलाम हुये तोसमझो पूरी हुई तपस्यारूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज़ सिलाने वालोंकुछ दीपक के बुझ जाने से आंगन नहीं मरा करता है।खोता कुछ भी नहीं यहाँ परकेवल जिल्द बदलती पोथीजैसे रात उतार चाँदनीपहने सुबह धूप की धोतीवस्त्र बदलकर आने वालों, चाल बदलकर जाने वालोंचंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।लाखों बार गगरिया फूटीशिकन नहीं आयी पनघट परलाखों बार किश्तियाँ डूबींचहल-पहल वो ही है तट परतम की उमर बढ़ाने वालों लौ की आयु घटाने वालोंलाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।लूट लिया माली ने उपवनलूटी न लेकिन गंध फूल कीतूफानों तक ने छेड़ा परखिड़की बन्द न हुई धूल कीनफ़रत गले लगाने वालों, सब पर धूल उड़ाने वालोंकुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पण नहीं मरा करता है।
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जीवन नहीं मारा करता है | गोपालदस नीरज छिप छिप अंश्रु बहाने वालों,मोती व्यर्थ लुटाने वालोंकुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।सपना क्या है, नयन सेज परसोया हुया आँख का पानीऔर टूटना है उसको ज्योंजागे कच्ची नींद जवानीगीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालोंकुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।माला बिखर गई तो क्या है,खुद ही हल हो गयी समस्याआंसू गर नीलाम हुये तोसमझो पूरी हुई तपस्यारूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज़ सिलाने वालोंकुछ दीपक के बुझ जाने से आंगन नहीं मरा करता है।खोता कुछ भी नहीं यहाँ परकेवल जिल्द बदलती पोथीजैसे रात उतार चाँदनीपहने सुबह धूप की धोतीवस्त्र बदलकर आने वालों, चाल बदलकर जाने वालोंचंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।लाखों बार गगरिया फूटीशिकन नहीं आयी पनघट परलाखों बार किश्तियाँ डूबींचहल-पहल वो ही है तट परतम की उमर बढ़ाने वालों लौ की आयु घटाने वालोंलाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।लूट लिया माली ने उपवनलूटी न लेकिन गंध फूल कीतूफानों तक ने छेड़ा परखिड़की बन्द न हुई धूल कीनफ़रत गले लगाने वालों, सब पर धूल उड़ाने वालोंकुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पण नहीं मरा करता है।
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