काशी के अन्य नाम आनन्द वन की कहानी...  episode artwork

EPISODE · Mar 11, 2021 · 9 MIN

काशी के अन्य नाम आनन्द वन की कहानी...

from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh

शिवोऽहम् दोस्तों, आज की कहानी है बहुत छोटी क्यों कि आज आप और मैं बहुत व्यस्त हैं. अरे भाई घर में विवाह हो तो काम होते हैं, न. किसका विवाह. अरे बाबा भोले नाथ और गौरी माँ का. तो जल्दी और थोड़े में समझ लिजीए कि प्रलय के समय परम ब्रह्म से उत्पन्न शिव स्वयं को जानने की यात्रा में अपने विग्रह से प्रकृति रुपी शिवा को रचते हैं. और उनके साथ विहार करने के लिए एक भूमि का निर्माण करते हैं. जब वहाँ बसते हैं तो वहाँ के जीवन से वहाँ की शान्ति से इतना प्रेम हो जाता है वही सदा के लिए रह जाते हैं. उस धरा का नाम काशी है. जो भोले बाबा और शिवा के प्रेम और करुणा से कभी विमुक्त नहीं हुआ. इसलिए यह अविमुक्त क्षेत्र कहलाया. यह कथा श्रुति पर आधारित है. श्री हरि विष्णु ने अपने गणों को यह कथा सुनायीं है. इस सत्य को हर कोई नहीं जान सकता. केवल वही इसे जानने के योग्य हैं जो शिवा और शिव को मानते हैं. उनको जानते हैं. उनको खोजते हैं. उनसे मिलने और आशीर्वाद पाने की इच्छा रखते हैं. जो जीवन को समझने और उसे समझाने के लिए तत्पर हैं, जो परम ब्रह्म को स्वीकार करते हैं. जो सतकर्म करते हैं. जो न्याय संगत जीवन जीते हैं, जो हर जड़ और चेतन में शिव को देखते हैं. उसे नमन करते हैं बस वही शिव के गण इस रहस्य को सुनने और जानने के योग्य हैं. आगे स्कंध देव महर्षि अगस्त्य को बताते हैं कि प्रभु ने जब भी हिमालय से अन्य कही विहार किया वह जगह जो शिव को शंकर बनाती है. पिता तुल्य बनाती है. जो शिवा को अपने हिमालय राज्य से भी अधिक प्रिय है. जहाँ से कभी नहीं जाने का वचन लिया देवी गौरी ने भोले नाथ से. जिसमें आकर स्वयं को आनंद से भरा हुआ महसूस किया है उस आनंद नगरी का नाम शिव और उनके गणों ने आनंद कानन रखा. वही अन्नपूर्णा की प्रिय नगरी मोक्ष दायिनी नगरी केवल एक है. काशी. अंधकारमय जीवन में तेज और सजीव प्रकाश है काशी. तीनों लोकों में जब अंधकार चरम पर होता हैं तब भी जो जीवन की अभिलाषा से जलता रहता है. ऐसा कभी भी नहीं बूझने वाला जीवन रस है काशी. आह काशी, वाह काशी, जीवन का अंत और आरम्भ है काशी. शिव और शिवा के प्रेम और समर्पण का अनंत रंग है काशी. माँ पार्वती का शक्ति पीठ है यह काशी. तीन युगों का महाश्मशान, कलियुग की शान है काशी. इस धरा पर अभिमान है काशी. शब्दों से परे है हमारी काशी. नमः पार्वती पतये हर हर महादेव... का जयघोष है काशी.

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