EPISODE · Nov 27, 2021 · 20 MIN
काशी के permanent कोतवाल काल भैरव
from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh
काल भैरव जयंती के अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। शनिवार अष्टमी ya काल अष्टमी नाम से जाना जाता hai। शिव पुराण के अनुसार दुनिया के आरंभ में क्षीर सागर में शेष नाग पर लेटे श्री विष्णु के नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्म प्रकट होते हैं। आँख खुलने पर दोनों देव एक दूसरे को अभिवादन करते है। फिर ब्रह्मदेव कहते हैं कि वो दुनिया के निर्माता हैं इसलिए वो विष्णु जी के भी पिता हैं। जबकि विष्णु कहते हैं कि ब्रह्म उनके नाभि कमल से उत्पन्न हुए है इसलिए वो उनके पिता है। यह बहस बढ़ती है और महादेव इसको सुलझाने के लिए सभा बुलाते हैं। सभा में एक अग्नि स्तंभ प्रकट होता है। जिसके आरंभ को ब्रह्म देव को और अंत को विष्णु जी को खोजना है। इस क्रिया में विष्णु जी जल्द वापस आ कर कहते है कि इस अग्नि स्तंभ का अंत नहीं। सभी ब्रह्मदेव के इंतजार में हैं वो क्या कहते हैं। ब्रह्मदेव बहुत समय बाद वापस आते हैं और झूठ बोलते हैं। तब अग्नि स्तंभ दो भागों में विभाजित हो जाता है। महादेव कहते हैं कि विष्णु श्रेष्ठ हैं क्यों उन्होंने सत्य बोला। ब्रह्म उनके अधीन हैं क्योंकि उन्होंने झूठ बोला। इस पर ब्रह्म क्रोधित होते हैं। शिव को अपमानित करने लगते हैं। शिव जी क्रोध में अपने स्थान से उठ खड़े होते हैं। उनका रूप रूद्र हो जाता है। मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि होती है। जब शिव काल भैरव रूप ले कर ब्रह्म के पांचवें सर को काट कर इस विवाद का अंत करते हैं। अब सब कुछ शांत होता है। पर स्वयं काल भैरव अशांत और ब्रह्म हत्या के पाप से ग्रसित होते हैं। उन्हें काशी में शांति और पाप से मुक्ति मिलती हैं। आकाश वाणी होती है। अब आप यही काशी नगरी में कोतवाल बन कर रहिये। तब से काशी के कोतवाल हैं काल भैरव। जिनके अनुमति के बिना काशी में वास और प्रवेश असंभव हैं। विश्वनाथ मंदिर से डेढ़ किमी दूर है। काल भैरव का मंदिर। भगवान विशेश्वर महादेव के विश्वेश्वर खंड में निवास करते हैं काल भैरव। आज उनका happy birthday hai। और क्या हैं काशी में खास जानने के लिए सुनिए और पढ़िए बनारसी सिंह का पॉडकास्ट। शेयर जरूर करें। एक दो बार साझा तो बनता हैं।
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