काशी विश्वनाथ से पूर्व आयी विशालाक्षी देवी काशी में [शक्ति पीठ] episode artwork

EPISODE · Aug 20, 2021 · 33 MIN

काशी विश्वनाथ से पूर्व आयी विशालाक्षी देवी काशी में [शक्ति पीठ]

from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh

नमस्कार आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है बनारसी सिंह के पॉडकास्ट में. आज की कहानी विशालाक्षी देवी की. यह मंदिर काशी के अन्य मंदिरों से अधिक प्राचीन है. यह महादेव द्वारा स्थापित शक्ति पीठ है. यह शिव और शक्ति का एकाकार रुप है. शिव की पत्नी सती के आत्मदाह के बाद शिव जी उनके शव को लेकर ब्रम्हांड में रुदन कर इधर उधर भटक रहे थे. अपने देवत्व का त्याग कर दिया था. त्रिदेव टुट गया था. सृष्टि का निर्माण और रक्षण खतरे में था. देवता शक्ति हीन हो रहे थे. असुर शक्ति धरती पर अपना कब्जा जमा रही थी. सभी के निवेदन पर नारायण ने सुदर्शन को भेजा ताकि देवी सती के शव को शिव से अलग किया जाये. सभी भयभीत थे कि कहीं महादेव क्रोध में ब्रम्हांड को ही नष्ट ना कर दें. फिर भी श्री हरी ने अपराध बोध को दूर करने के लिए सती के शव को खंडीत किया. अब शिव सती के शव से भी हीन हो गये. इन पिंडों को पुनः एकत्र करने के लिए धरती पर आये. धरती पर भटकते रहे. भूखे प्यासे विरह में. सबको पहचानने से इनकार कर दिया था. नंदी को भी पहचान नहीं रहे थे. मानव वेदना के चरम पर थे. तब देवी आदि शक्ति सती के रुप में आयी समझाया कि आप त्रिकालदर्शी है सब जानते हैं फिर यह संताप क्यों. पुनः अपने देवत्व को आपनाये और इन पिंडों को एकत्र कर धरती पर स्वयं शक्ति पीठों का निर्माण करें जो अनंत काल तक मानव कल्याण का केंद्र रहेगा. यह शिव और शक्ति के मिलन और एकाकार रुप का प्रतीक होंगे. तब महादेव ने पुनः अपने जगत पिता रुप को धारण किया. सभी सप्तर्षि और देवता भी सहयोग में आये. इन पिंडों को स्पर्श कर महादेव ने जाग्रत किया अपनी शक्ति से और सभी 52 पीठों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कालभैरव को दिया. काशी स्थित विशालाक्षी देवी सती माता के शक्ति पीठ में से एक है जिसका निर्माण स्वयं महादेव ने किया. और कालभैरव को भक्तों और पीठ के सुरक्षा हेतु रखा. काशी में भविष्य में मेरा ज्योतिर्लिंग स्थापित होगा और यहाँ गंगा का अवतरण होगा यह भी बताया. इस प्रकार शक्ति पीठों का निर्माण स्वयं महादेव ने किया. विशालाक्षी देवी का मंदिर मीर घाट से उपर गली में गणपति गेस्ट हाउस के पास धर्मेश्वर महादेव मंदिर के समीप है. चैत्र माह और नवरात्रि में देवी की पूजा पंचमी को गौरी रुप में होती हैं. अन्य जानकारी के लिए पॉडकास्ट जरूर सुनें. हर हर महादेव... स्वस्थ रहे, दो गज दुरी का ध्यान रखें. वैक्सीन जरूर लगवाए. मास्क पहने, अपने और अपनों का ध्यान रखें. फिर मिलेंगे नयी कहानी के साथ. राधे राधे...

नमस्कार आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है बनारसी सिंह के पॉडकास्ट में. आज की कहानी विशालाक्षी देवी की. यह मंदिर काशी के अन्य मंदिरों से अधिक प्राचीन है. यह महादेव द्वारा स्थापित शक्ति पीठ है. यह शिव और शक्ति का एकाकार रुप है. शिव की पत्नी सती के आत्मदाह के बाद शिव जी उनके शव को लेकर ब्रम्हांड में रुदन कर इधर उधर भटक रहे थे. अपने देवत्व का त्याग कर दिया था. त्रिदेव टुट गया था. सृष्टि का निर्माण और रक्षण खतरे में था. देवता शक्ति हीन हो रहे थे. असुर शक्ति धरती पर अपना कब्जा जमा रही थी. सभी के निवेदन पर नारायण ने सुदर्शन को भेजा ताकि देवी सती के शव को शिव से अलग किया जाये. सभी भयभीत थे कि कहीं महादेव क्रोध में ब्रम्हांड को ही नष्ट ना कर दें. फिर भी श्री हरी ने अपराध बोध को दूर करने के लिए सती के शव को खंडीत किया. अब शिव सती के शव से भी हीन हो गये. इन पिंडों को पुनः एकत्र करने के लिए धरती पर आये. धरती पर भटकते रहे. भूखे प्यासे विरह में. सबको पहचानने से इनकार कर दिया था. नंदी को भी पहचान नहीं रहे थे. मानव वेदना के चरम पर थे. तब देवी आदि शक्ति सती के रुप में आयी समझाया कि आप त्रिकालदर्शी है सब जानते हैं फिर यह संताप क्यों. पुनः अपने देवत्व को आपनाये और इन पिंडों को एकत्र कर धरती पर स्वयं शक्ति पीठों का निर्माण करें जो अनंत काल तक मानव कल्याण का केंद्र रहेगा. यह शिव और शक्ति के मिलन और एकाकार रुप का प्रतीक होंगे. तब महादेव ने पुनः अपने जगत पिता रुप को धारण किया. सभी सप्तर्षि और देवता भी सहयोग में आये. इन पिंडों को स्पर्श कर महादेव ने जाग्रत किया अपनी शक्ति से और सभी 52 पीठों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कालभैरव को दिया. काशी स्थित विशालाक्षी देवी सती माता के शक्ति पीठ में से एक है जिसका निर्माण स्वयं महादेव ने किया. और कालभैरव को भक्तों और पीठ के सुरक्षा हेतु रखा. काशी में भविष्य में मेरा ज्योतिर्लिंग स्थापित होगा और यहाँ गंगा का अवतरण होगा यह भी बताया. इस प्रकार शक्ति पीठों का निर्माण स्वयं महादेव ने किया. विशालाक्षी देवी का मंदिर मीर घाट से उपर गली में गणपति गेस्ट हाउस के पास धर्मेश्वर महादेव मंदिर के समीप है. चैत्र माह और नवरात्रि में देवी की पूजा पंचमी को गौरी रुप में होती हैं. अन्य जानकारी के लिए पॉडकास्ट जरूर सुनें. हर हर महादेव... स्वस्थ रहे, दो गज दुरी का ध्यान रखें. वैक्सीन जरूर लगवाए. मास्क पहने, अपने और अपनों का ध्यान रखें. फिर मिलेंगे नयी कहानी के साथ. राधे राधे...

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Bakulesh Jamnadas Mehta's podcast (1) Bakulesh Jamnadas Mehta मैं गांधीधाम गुजरात से हुँ मेरी आयु ७५ साल है मैं काव्य लेखन करता हूँ और हमारे धार्मिक पुस्तकें जो पढता हूँ वह आप तक पहुंचाता हूं। Explicit एपिसोड एक. क्या आप बीमार और थके हुए हैं? Paul Steen हम "नहीं" की शक्ति का पता लगाएंगे। "नहीं" का उपयोग करने से हमारे जीवन में बदलाव आता है और हम जो हैं उसे समायोजित कर पाते हैं। हम अपने व्यवहार को बदलने के लिए स्वयं के महत्वपूर्ण तत्वों का पता लगाएंगे। Explicit My Thoughts Kandarp Dave "चलो कुछ अच्छा सुनते है और अपने आप को ढूंढते है"If You Get Any Value From This Podcast Share This As Much As Possible And Make Sure You Follow Podcast For Future Updates.For Any Questions, Feedback Or Suggestions Mail Me At [email protected] Explicit The Sameer Saawan Podcasts Sameer Saawan नमस्ते दोस्तों! समीर सावन यहाँ हैं, आपके पसंदीदा पॉडकास्ट पर स्वागत करते हैं। हम इस पॉडकास्ट में अनगिनत किस्सों का साझा करेंगे, जो आपकी दिनचर्या को महसूस कराएंगे, आपके मन को सुकून देंगे, और आपके जीवन को और भी रंगीन बनाएंगे। हमारे पॉडकास्ट में आपको मिलेगा: Motivational कहानियाँ: जो आपकी मोटिवेशन और सोच को प्रेरित करेंगी। Love स्टोरीज: कैसे बनाएं अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस? दर्द की बातें: हम साथ हैं आपके दुखों और सुखों में। शायरी: जब शब्द दिल से निकलते हैं, तो वे सच्ची भावनाओं को छू सकते हैं। कहानियाँ: हर कहानी कुछ सिखाती है, हर कहानी कुछ कहती है। अनकही, अनसुनी बातें: जिन्हें हम अक्सर बोलने से कतराते हैं, लेकिन जो हमारे दिलों में बसी रहती हैं। और हाँ, हम आपके साथ हैं! अगर आपके पास कोई खास मोटिवेशनल कहानी या लव स्टोरी है, तो कृपया हमारे साथ साझा करें। हम आपके नाम के साथ उसे हमारे पॉडकास्ट में शेयर करेंगे, ताकि और भी लोग उससे प्रेरित हो सकें। आइए, हमारे साथ जुड़ें और "The Sameer Saawan Podcasts" के साथ अद्भुत और अनूठे किस्सों का आनंद लें। खुश रहें, मस्त रहें, और सुनते रहें Explicit

Frequently Asked Questions

How long is this episode of कल थी काशी, आज है बनारस?

This episode is 33 minutes long.

When was this कल थी काशी, आज है बनारस episode published?

This episode was published on August 20, 2021.

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नमस्कार आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है बनारसी सिंह के पॉडकास्ट में. आज की कहानी विशालाक्षी देवी की. यह मंदिर काशी के अन्य मंदिरों से अधिक प्राचीन है. यह महादेव द्वारा स्थापित शक्ति पीठ है. यह शिव और शक्ति का एकाकार रुप है. शिव की पत्नी सती के आत्मदाह...

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