EPISODE · Aug 14, 2023 · 1 MIN
Kalam, Aaj Unki Jai Bol | Ramdhari Singh 'Dinkar'
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
कलम, आज उनकी जय बोल | रामधारी सिंह ‘दिनकर’ कलम, आज उनकी जय बोल जला अस्थियाँ बारी-बारीछिटकाई जिनने चिंगारी,जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल।कलम, आज उनकी जय बोल। जो अगणित लघु दीप हमारेतूफानों में एक किनारे,जल-जलकर बुझ गए, किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल।कलम, आज उनकी जय बोल। पीकर जिनकी लाल शिखाएँउगल रहीं लू लपट दिशाएं,जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल।कलम, आज उनकी जय बोल। अंधा चकाचौंध का माराक्या जाने इतिहास बेचारा?साखी हैं उनकी महिमा के सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल।कलम, आज उनकी जय बोल।
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कलम, आज उनकी जय बोल | रामधारी सिंह ‘दिनकर’ कलम, आज उनकी जय बोल जला अस्थियाँ बारी-बारीछिटकाई जिनने चिंगारी,जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल।कलम, आज उनकी जय बोल। जो अगणित लघु दीप हमारेतूफानों में एक किनारे,जल-जलकर बुझ गए, किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल।कलम, आज उनकी जय बोल। पीकर जिनकी लाल शिखाएँउगल रहीं लू लपट दिशाएं,जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल।कलम, आज उनकी जय बोल। अंधा चकाचौंध का माराक्या जाने इतिहास बेचारा?साखी हैं उनकी महिमा के सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल।कलम, आज उनकी जय बोल।
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