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Kapas Ke Phool | Kedarnath Singh

EPISODE · Aug 7, 2023 · 2 MIN

Kapas Ke Phool | Kedarnath Singh

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

कपास के फूल - केदारनाथ सिंह कपास के फूल वे देवता को पसंद नहीं लेकिन आश्चर्य इस पर नहीं आश्चर्य तो ये है कि कविगण भी लिखते नहीं कविता कपास के फूल परप्रेमीजन भेंट में देते नहीं उसेकभी एक-दूसरे को जबकि वह है कि नंगा होने सेबचाता है सबकोऔर सुतर गया मौसमतो भूख और प्यास से भी बचाता है वहईश्वर को तो ठण्ड लगती नहीं वैसे नंगा होना भीवहाँ उतना ही सहज हैउतना ही दिव्य इसलिए इतना तय है कि ठंड के विरुद्ध आदमी ने ही खोजा होगापृथ्वी पर पहला कपास का फूलपर पहला झिंगोला कब पहना उसनेपहले तागे से पहले सुई कीकब हुई थी भेंट यह भूल गई है हमारी भाषाजैसे अपनी कमीज़ पहनकरभूल जाते हैं हमअपने दर्ज़ी का नामपर क्या कभी सोचा है आपनेवह जो आपकी कमीज़ हैकिसी खेत में खिलाएक कपास का फूल हैजिसे पहन रखा है आपनेजब फ़ुर्सत मिलेतो कृपया एक बार इस पर सोचें ज़रूरकि इस पूरी कहानी में सूत से सुई तक सब कुछ हैपर वह कहाँ गया जो इसका शीर्षक था।

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Kapas Ke Phool | Kedarnath Singh

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