Kashi ka नाग लोक, जानिए इस episodes में... episode artwork

EPISODE · Aug 13, 2021 · 30 MIN

Kashi ka नाग लोक, जानिए इस episodes में...

from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh

आप सभी मित्रों और स्वजनों को नागपंचमी पर्व की हार्दिक बधाई. आज काशी की कहानी में पाताल निवासी शिव और उनके भक्तों यानि नाग देवताओं के अस्तित्व और सनातन धर्म में उनके स्थान और छोटे गुरु और बड़े गुरु परंपरा के बारे में थोड़ी जानकारी मिलेगी इस कड़ी में. देखिए बचपन में हम त्योहार बस घूमने फिरने और खाने पीने का एक मौका मानते थे. है ना. पर कभी हमें यह नहीं बताया गया कि कोई पर्व और उत्सव का हमारे जीवन में क्या महत्व है. पर सभी हिन्दू पर्व एक गहरी सोच और जीवन ज्ञान को लेकर निर्मित किए गये हैं. यह मानव समाज में समानता, पोषण और सह- अस्तित्व की भावना को अंजाने में ही आदत बनाने का एक बेहतरीन कला है. अब नाग पंचमी में नाग देवता की पूजा करो. शिव के शरणागत हैं यह नाग देवता. मनुष्य ने इनसे धरती झीन लिया इसलिए सभी पाताल में रहते हैं. यह भोले भाले जीव है. पर मनुष्य कभी सपेरा बन के, कभी बाजार में मुनाफा कमाने के लिए, कभी सौंदर्य प्रसाधन के लिए, कभी दवा बनाने के लिए, इनका इतना शिकार करता है कि यह अपने अंत पर आ गये. पांडव जब हस्तीनापुर से निकाले गये तो खांडवप्रस्थ आये. यहाँ तकक्षक रहते थे अपने सर्पों के साथ. यही इंद्रप्रस्थ बना. और अब दिल्ली है. नागों को पाताल भेज दिया गया. इसी वंश में राजा परीक्षीत को तक्षक ने शाप वश डंसा. यह तक्षक का संकल्प भी था कि मैं पांडव कुल के नाश का कारण बनूं. फिर जनमेजय ने अपने पिता के मृत्यु का बदला लेने के लिए नाग यज्ञ किया ताकि पूरी धरती नाग हीन हो जाये. तो नाग और मानव की शत्रुता नयी है पर मित्रता और सह अस्तित्व का संबंध बहुत पुराना. काशी में नागवंशी राजाओं का शासन था. ऐसा स्कंध पुराण में लिखा गया है. नागवंशी राजा महाराजा हुए हैं पूरे भारत वर्ष में. नागवंश से हमारे महादेव और श्री हरि को अति प्रेम है. शेषनाग धरती को थामें हैं तो वासुकी ने समुद्र मंथन में रस्सी बनकर देवो को अमृत और धनधान्य प्रदान किया. कोई ब्रह्म लोक में रहता है तो कोई बैकुंठ में. कोई कैलाश पर. सृष्टि के सृजन में और निमार्ण में इनका भी महत्व रहा है. इस योगदान के लिए अगर नागों को पूजा जाये और उनको संरक्षित किया जाये. क्योंकि वो जीवन परंपरा की प्राचीन धरोहर हैं तो नागपंचमी अवश्य मनानी चाहिए. इससे कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति मिलती हैं. सेवा और संरक्षण ही तो सनातन धर्म की परंपरा है. है ना. तो प्रेम से मनायी ये यह पर्व. हर हर महादेव.

आप सभी मित्रों और स्वजनों को नागपंचमी पर्व की हार्दिक बधाई. आज काशी की कहानी में पाताल निवासी शिव और उनके भक्तों यानि नाग देवताओं के अस्तित्व और सनातन धर्म में उनके स्थान और छोटे गुरु और बड़े गुरु परंपरा के बारे में थोड़ी जानकारी मिलेगी इस कड़ी में. देखिए बचपन में हम त्योहार बस घूमने फिरने और खाने पीने का एक मौका मानते थे. है ना. पर कभी हमें यह नहीं बताया गया कि कोई पर्व और उत्सव का हमारे जीवन में क्या महत्व है. पर सभी हिन्दू पर्व एक गहरी सोच और जीवन ज्ञान को लेकर निर्मित किए गये हैं. यह मानव समाज में समानता, पोषण और सह- अस्तित्व की भावना को अंजाने में ही आदत बनाने का एक बेहतरीन कला है. अब नाग पंचमी में नाग देवता की पूजा करो. शिव के शरणागत हैं यह नाग देवता. मनुष्य ने इनसे धरती झीन लिया इसलिए सभी पाताल में रहते हैं. यह भोले भाले जीव है. पर मनुष्य कभी सपेरा बन के, कभी बाजार में मुनाफा कमाने के लिए, कभी सौंदर्य प्रसाधन के लिए, कभी दवा बनाने के लिए, इनका इतना शिकार करता है कि यह अपने अंत पर आ गये. पांडव जब हस्तीनापुर से निकाले गये तो खांडवप्रस्थ आये. यहाँ तकक्षक रहते थे अपने सर्पों के साथ. यही इंद्रप्रस्थ बना. और अब दिल्ली है. नागों को पाताल भेज दिया गया. इसी वंश में राजा परीक्षीत को तक्षक ने शाप वश डंसा. यह तक्षक का संकल्प भी था कि मैं पांडव कुल के नाश का कारण बनूं. फिर जनमेजय ने अपने पिता के मृत्यु का बदला लेने के लिए नाग यज्ञ किया ताकि पूरी धरती नाग हीन हो जाये. तो नाग और मानव की शत्रुता नयी है पर मित्रता और सह अस्तित्व का संबंध बहुत पुराना. काशी में नागवंशी राजाओं का शासन था. ऐसा स्कंध पुराण में लिखा गया है. नागवंशी राजा महाराजा हुए हैं पूरे भारत वर्ष में. नागवंश से हमारे महादेव और श्री हरि को अति प्रेम है. शेषनाग धरती को थामें हैं तो वासुकी ने समुद्र मंथन में रस्सी बनकर देवो को अमृत और धनधान्य प्रदान किया. कोई ब्रह्म लोक में रहता है तो कोई बैकुंठ में. कोई कैलाश पर. सृष्टि के सृजन में और निमार्ण में इनका भी महत्व रहा है. इस योगदान के लिए अगर नागों को पूजा जाये और उनको संरक्षित किया जाये. क्योंकि वो जीवन परंपरा की प्राचीन धरोहर हैं तो नागपंचमी अवश्य मनानी चाहिए. इससे कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति मिलती हैं. सेवा और संरक्षण ही तो सनातन धर्म की परंपरा है. है ना. तो प्रेम से मनायी ये यह पर्व. हर हर महादेव.

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Bakulesh Jamnadas Mehta's podcast (1) Bakulesh Jamnadas Mehta मैं गांधीधाम गुजरात से हुँ मेरी आयु ७५ साल है मैं काव्य लेखन करता हूँ और हमारे धार्मिक पुस्तकें जो पढता हूँ वह आप तक पहुंचाता हूं। Explicit एपिसोड एक. क्या आप बीमार और थके हुए हैं? Paul Steen हम "नहीं" की शक्ति का पता लगाएंगे। "नहीं" का उपयोग करने से हमारे जीवन में बदलाव आता है और हम जो हैं उसे समायोजित कर पाते हैं। हम अपने व्यवहार को बदलने के लिए स्वयं के महत्वपूर्ण तत्वों का पता लगाएंगे। Explicit My Thoughts Kandarp Dave "चलो कुछ अच्छा सुनते है और अपने आप को ढूंढते है"If You Get Any Value From This Podcast Share This As Much As Possible And Make Sure You Follow Podcast For Future Updates.For Any Questions, Feedback Or Suggestions Mail Me At [email protected] Explicit The Sameer Saawan Podcasts Sameer Saawan नमस्ते दोस्तों! समीर सावन यहाँ हैं, आपके पसंदीदा पॉडकास्ट पर स्वागत करते हैं। हम इस पॉडकास्ट में अनगिनत किस्सों का साझा करेंगे, जो आपकी दिनचर्या को महसूस कराएंगे, आपके मन को सुकून देंगे, और आपके जीवन को और भी रंगीन बनाएंगे। हमारे पॉडकास्ट में आपको मिलेगा: Motivational कहानियाँ: जो आपकी मोटिवेशन और सोच को प्रेरित करेंगी। Love स्टोरीज: कैसे बनाएं अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस? दर्द की बातें: हम साथ हैं आपके दुखों और सुखों में। शायरी: जब शब्द दिल से निकलते हैं, तो वे सच्ची भावनाओं को छू सकते हैं। कहानियाँ: हर कहानी कुछ सिखाती है, हर कहानी कुछ कहती है। अनकही, अनसुनी बातें: जिन्हें हम अक्सर बोलने से कतराते हैं, लेकिन जो हमारे दिलों में बसी रहती हैं। और हाँ, हम आपके साथ हैं! अगर आपके पास कोई खास मोटिवेशनल कहानी या लव स्टोरी है, तो कृपया हमारे साथ साझा करें। हम आपके नाम के साथ उसे हमारे पॉडकास्ट में शेयर करेंगे, ताकि और भी लोग उससे प्रेरित हो सकें। आइए, हमारे साथ जुड़ें और "The Sameer Saawan Podcasts" के साथ अद्भुत और अनूठे किस्सों का आनंद लें। खुश रहें, मस्त रहें, और सुनते रहें Explicit

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How long is this episode of कल थी काशी, आज है बनारस?

This episode is 30 minutes long.

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This episode was published on August 13, 2021.

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आप सभी मित्रों और स्वजनों को नागपंचमी पर्व की हार्दिक बधाई. आज काशी की कहानी में पाताल निवासी शिव और उनके भक्तों यानि नाग देवताओं के अस्तित्व और सनातन धर्म में उनके स्थान और छोटे गुरु और बड़े गुरु परंपरा के बारे में थोड़ी जानकारी मिलेगी इस कड़ी में....

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