Kashi ka शक्ति केंद्र अन्नपूर्णा mandir episode artwork

EPISODE · Nov 16, 2020 · 10 MIN

Kashi ka शक्ति केंद्र अन्नपूर्णा mandir

from कल थी काशी, आज है बनारस · host Banarasi/singh

इस बार की कहानी या लोककथा को प्रत्यक्ष रुप से आप महसूस भी कर सकते हैं. पर इसको अनुभव करने के लिए अब आपको अगले वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी यानि तेरस तक इंतजार करना होगा. क्योंकि हर वर्ष धनतेरस को ही देवी अन्नपूर्णा के मंदिर के द्वार आम भक्तों के लिए पांच दिन के लिए खुलते हैं. तभी से काशी में दिपोत्सव भी शुरू हो जाता है जो अन्न कूट तक चलता है. इस दौरान भक्तों को अन्ना धन का प्रसाद भी मिलता है. जिसे पाकर भक्त का जीवन और परिवार समृद्ध हो जाता है. लाखों की संख्या में लोग देश दुनिया से काशी आते हैं और माता अन्नपूर्णा के स्वर्णिम प्रतिमा के दर्शन करते हैं. इस सनातन परंपरा से जुड़ी एक कहानी है. स्कंध पुराण में वर्णित हैं कि जब देवी पार्वती ने काशी में शिव जी के साथ गृहस्थी शुरू किया. तब काशी महाश्मशान के रुप में जानी जाती थी. आम गृहणी की तरह देवी को भी अपने घर 🏡 यानि काशी के श्मशान कहे जाने पर उचित नहीं लगता था फिर उन्होंने शिव जी से भी इस बारे में बात की. तब दोनों लोगों ने तय किया सतयुग, त्रेता युग और द्वापरयुग में काशी को भले ही महाश्मशान नगरी कहा जाए पर कलियुग में काशी समृद्ध और संपन्न नगरी के रुप में जानी जाएगी. इसलिए अब की काशी जहाँ एक ओर शिव का प्रिय श्मशान है वहीं यह देवी के प्रधान शाक्ति पीठ में से एक है. काशी के केदारखंड में स्थित अन्नपूर्णा देवी यही काशी से सभी के लिए अन्ना और धन का प्रबंध करती हैं. कहते हैं काशी में मां का आशीर्वाद है यहाँ कोई भी भूखा पेट नहीं होता. एक अन्य पुराण कहता है कि शिव जी काशी में एक गृहस्थ के रुप में रहते थे, देवी पार्वती जो शिव की अर्धांगिनी हैं वह एक गृहणी सी सारे काशी की व्यवस्था देखती हैं, काशीवासी बाबा और माता की संतान है जिनकी सुरक्षा और पोषण इन दोनों दंपति का दायित्व है जिसे महादेव और देवी गौरी सदियों से निभा रहे. देवी का अन्नपूर्णा स्वरूप मातृत्व से भरा और जीवन उर्जा से भरा है. काशी एक मस्तमौला शहर है. यहाँ लोग उठते हैं हरहर महादेव हर हर गंगे बोलते हुए और सोते हैं मां अन्नपूर्णा को धन्यवाद करते हुए. बेफिक्ररी काशी की हवा में है. क्योंकि जहाँ के इष्ट महादेव हो और माँ देवी पार्वती वहाँ के लोग को चिंता कैसी. आप भी सब कुछ महादेव और माता के सामने समर्पित कर दें. उनमें विश्वास रखें आपका कल्याण होगा. प्रेम से बोलिये उमा पार्वती पतये नमः हर हर महादेव..... शुभ रात्रि..

इस बार की कहानी या लोककथा को प्रत्यक्ष रुप से आप महसूस भी कर सकते हैं. पर इसको अनुभव करने के लिए अब आपको अगले वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी यानि तेरस तक इंतजार करना होगा. क्योंकि हर वर्ष धनतेरस को ही देवी अन्नपूर्णा के मंदिर के द्वार आम भक्तों के लिए पांच दिन के लिए खुलते हैं. तभी से काशी में दिपोत्सव भी शुरू हो जाता है जो अन्न कूट तक चलता है. इस दौरान भक्तों को अन्ना धन का प्रसाद भी मिलता है. जिसे पाकर भक्त का जीवन और परिवार समृद्ध हो जाता है. लाखों की संख्या में लोग देश दुनिया से काशी आते हैं और माता अन्नपूर्णा के स्वर्णिम प्रतिमा के दर्शन करते हैं. इस सनातन परंपरा से जुड़ी एक कहानी है. स्कंध पुराण में वर्णित हैं कि जब देवी पार्वती ने काशी में शिव जी के साथ गृहस्थी शुरू किया. तब काशी महाश्मशान के रुप में जानी जाती थी. आम गृहणी की तरह देवी को भी अपने घर 🏡 यानि काशी के श्मशान कहे जाने पर उचित नहीं लगता था फिर उन्होंने शिव जी से भी इस बारे में बात की. तब दोनों लोगों ने तय किया सतयुग, त्रेता युग और द्वापरयुग में काशी को भले ही महाश्मशान नगरी कहा जाए पर कलियुग में काशी समृद्ध और संपन्न नगरी के रुप में जानी जाएगी. इसलिए अब की काशी जहाँ एक ओर शिव का प्रिय श्मशान है वहीं यह देवी के प्रधान शाक्ति पीठ में से एक है. काशी के केदारखंड में स्थित अन्नपूर्णा देवी यही काशी से सभी के लिए अन्ना और धन का प्रबंध करती हैं. कहते हैं काशी में मां का आशीर्वाद है यहाँ कोई भी भूखा पेट नहीं होता. एक अन्य पुराण कहता है कि शिव जी काशी में एक गृहस्थ के रुप में रहते थे, देवी पार्वती जो शिव की अर्धांगिनी हैं वह एक गृहणी सी सारे काशी की व्यवस्था देखती हैं, काशीवासी बाबा और माता की संतान है जिनकी सुरक्षा और पोषण इन दोनों दंपति का दायित्व है जिसे महादेव और देवी गौरी सदियों से निभा रहे. देवी का अन्नपूर्णा स्वरूप मातृत्व से भरा और जीवन उर्जा से भरा है. काशी एक मस्तमौला शहर है. यहाँ लोग उठते हैं हरहर महादेव हर हर गंगे बोलते हुए और सोते हैं मां अन्नपूर्णा को धन्यवाद करते हुए. बेफिक्ररी काशी की हवा में है. क्योंकि जहाँ के इष्ट महादेव हो और माँ देवी पार्वती वहाँ के लोग को चिंता कैसी. आप भी सब कुछ महादेव और माता के सामने समर्पित कर दें. उनमें विश्वास रखें आपका कल्याण होगा. प्रेम से बोलिये उमा पार्वती पतये नमः हर हर महादेव..... शुभ रात्रि..

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Bakulesh Jamnadas Mehta's podcast (1) Bakulesh Jamnadas Mehta मैं गांधीधाम गुजरात से हुँ मेरी आयु ७५ साल है मैं काव्य लेखन करता हूँ और हमारे धार्मिक पुस्तकें जो पढता हूँ वह आप तक पहुंचाता हूं। Explicit एपिसोड एक. क्या आप बीमार और थके हुए हैं? Paul Steen हम "नहीं" की शक्ति का पता लगाएंगे। "नहीं" का उपयोग करने से हमारे जीवन में बदलाव आता है और हम जो हैं उसे समायोजित कर पाते हैं। हम अपने व्यवहार को बदलने के लिए स्वयं के महत्वपूर्ण तत्वों का पता लगाएंगे। Explicit My Thoughts Kandarp Dave "चलो कुछ अच्छा सुनते है और अपने आप को ढूंढते है"If You Get Any Value From This Podcast Share This As Much As Possible And Make Sure You Follow Podcast For Future Updates.For Any Questions, Feedback Or Suggestions Mail Me At [email protected] Explicit The Sameer Saawan Podcasts Sameer Saawan नमस्ते दोस्तों! समीर सावन यहाँ हैं, आपके पसंदीदा पॉडकास्ट पर स्वागत करते हैं। हम इस पॉडकास्ट में अनगिनत किस्सों का साझा करेंगे, जो आपकी दिनचर्या को महसूस कराएंगे, आपके मन को सुकून देंगे, और आपके जीवन को और भी रंगीन बनाएंगे। हमारे पॉडकास्ट में आपको मिलेगा: Motivational कहानियाँ: जो आपकी मोटिवेशन और सोच को प्रेरित करेंगी। Love स्टोरीज: कैसे बनाएं अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस? दर्द की बातें: हम साथ हैं आपके दुखों और सुखों में। शायरी: जब शब्द दिल से निकलते हैं, तो वे सच्ची भावनाओं को छू सकते हैं। कहानियाँ: हर कहानी कुछ सिखाती है, हर कहानी कुछ कहती है। अनकही, अनसुनी बातें: जिन्हें हम अक्सर बोलने से कतराते हैं, लेकिन जो हमारे दिलों में बसी रहती हैं। और हाँ, हम आपके साथ हैं! अगर आपके पास कोई खास मोटिवेशनल कहानी या लव स्टोरी है, तो कृपया हमारे साथ साझा करें। हम आपके नाम के साथ उसे हमारे पॉडकास्ट में शेयर करेंगे, ताकि और भी लोग उससे प्रेरित हो सकें। आइए, हमारे साथ जुड़ें और "The Sameer Saawan Podcasts" के साथ अद्भुत और अनूठे किस्सों का आनंद लें। खुश रहें, मस्त रहें, और सुनते रहें Explicit

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This episode was published on November 16, 2020.

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