EPISODE · Apr 12, 2023 · 7 MIN
Kate Haath | Ashok Chakradhar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
कटे हाथ | अशोक चक्रधर बगल में एक पोटली दबाएएक सिपाही थाने में घुसाऔर सहसाथानेदार को सामने पाकरसैल्यूट माराथानेदार ने पोटली की तरफ निहारासैल्यूट के झटके में पोटली भिंच गईऔर उसमें से एक गाढी-सी कत्थई बूंद रिस गईथानेदार ने पूछा:'ये पोटली में से क्या टपक रहा है ?क्या कहीं से शरबत की बोतलेंमारके आ रहा है ?सिपाही हडबढाया , हुजूर इसमें शरबत नहीं हैशरबत नहीं हैतो घबराया क्यों है, हद हैशरबत नहीं है, तो क्या शहद है?सिपाही कांपा, शर शहद भी नहीं हैइसमें से तोकुछ और ही चीज बही हैऔर ही चीज, तो खून है क्?अबे जल्दी बताक्या किसी मुर्गे की गरदन मरोड़ दीक्या किसी मेमने की टांग तोड़ दीअगर ऐसा है तो बहुत अच्छा हैपकाएंगेहम भी खाएंगे, तुझे भी खिलाएंगे!सिपाही घिघियायासर! न पका सकता हूं, न खा सकता हूंमैं तो बस आपको दिखा सकता हूंइतना कहकर सिपाही ने मेज पर पोटली खोलीदेखते ही, थानेदार की आत्मा भी डोलीपोटली से निकलेकिसी नौजवान के दो कटे हुए हाथथानेदार ने पूछाए , बता क्या है बातयह क्या कलेस है ?सिपाही बोला, हुजूर!रेलवे लाइन एक्सीडेंट का केस हैएक्सीडेंट का केस है।तो यहां क्यों लाया है,और बीस परसेंट बाडी ले आया है।एट़टी परसेंट कहां छोड़ आया है।सिपाही ने कहा, माई-बापयह बंदा इसलिए तो शर्मिंदा हैक्योंकि एट्टी परसेंट बाडी तो जिंदा हैपूरी लाश होती तो यहां क्यों लातावहीं उसका पंचनामा न बनातालेकिन गजब बहुत बड़ा हो गयावह तो हाथ कटवा के खड़ा हो गयारेल गुजर गई तो मैं दौडावह तो तना था मानिंदे हथौडामुझे देखकर मुसकराने लगाऔर अपनी ठूंठ बाहों कोहिला-हिलाकर बताने लगाले जा, ले जाये फालतू हैं, बेकार हैंऔर बुलरा ले कहां पत्रकार हैं ?मैं उन्हें बताऊंगा कि काट दिएइसलिए किमैंने झेला है भूख और गरीबी काएक लंबा सिलसिलापंद्रह वर्ष हो गएइन हाथों को कोई काम ही नहीं मिलाहां, इसलिए-इसलिएमैंने सोचा कि फालतू हैंइन्हें काट दूंऔर इस सोए हुए जनतंत्र केआलसी पत्रकारों कोलिखने के लिए प्लाट दूंप्लाट दूं कि इन कटे हाथों कोपंद्रह साल सेरोजी-रोटी की तलाश हैआदमी जिंदा है औरये उसकी तलाश की लाश है।इसे उठा लेअरे, इन दोनों हाथों को उठा लेकटवा के भी मैं तो जिंदा हूंतू क्यो मर गया ?हुजूर, इतना सुनकर मैं तो डर गयाजिन्न है या भूतमैने किसी तरह अपने-आपको साधाहाथों को झटके से उठायापोटली में बांधाऔर यहां चला आयाहुजूर, अब मुझे न भेजेंऔर इन हाथों को भीआप ही सहेजें।थानेदार चकरा गयाशायद कटे हाथ देखकर घबरा गयाबोला, इन्हें मेडिकल कालेज ले जा,लडके इन्हें देखकर डरेंगे नहींइनकी चीर-फाड़ करके स्टडी करेंगे।इसके बाद पता नहीं क्या हुआलेकिन घटना ने मन को छुआअरे उस पढ़े लिखे नौजवान नेअपने हाथों को खो दियाऔर सच कहता हूं अखबार मेंयह खबर पढ़कर मैं रो दिया।सोचने लगाकि इसे पढ़करतथाकथित बडे लोगशर्म से क्यों नही गड़ गएदेखिए, आज एक अकेले पेट के लिएदो हाथ भी कम हो गए।वह उकता गया झूठे वादों, झूठी बातों से,वरना क्या नहीं कर सकता थाअपने हाथों सेवह इन हाथों से किसी मकान कानक्शा बना सकता थाहाथों में बंदूक थामकरदेश को सुरक्षा दिला सकता था।इन हाथों से वह कोईसडक बना सकता थाऔर तो औरब्लैक बोर्ड पर 'ह' से हाथ लिखकरबच्चों को पढ़ा सकता था,मैं सोचता हूंइन्हीं हाथों से उसे बचपन मेंतिमाही, छमाही, सालाना परीक्षाएं दी होंगी,मां ने पास होने की दुआएं की होंगी।इन्हीं हाथों से वहप्रथम श्रेणी में पास होने कीखबर लाया होगा,इन्हीं हाथों से उसनेखुशी का लड़डू खाया होगा।इन्हीं हाथों में डिग्रियां सहेजी होंगीइन्हीं हाथों से अर्जियां भेजी होंगी।और अगर काम पा जातातो यह नपूताइन्हीं हाथों से मां के पांव भी छूताखुशी में इन हाथों से ढपली बजाताऔर किसी खास रात कोइन्हीं हाथों सेदुलहन का घूंघट उठाता।इन्हीं हाथों से झुनझुना बजाकरबेटी को बहलातारोते हुए बेटे के गाल सहलातातूने तो काट लिए मेरे दोस्तलेकिन तू कायर नहीं हैकायर तो तब होताजब समूचा कट जाताऔर देश के रास्ते सेहमेशा-हमेशा को हट जातासरदार भगत सिंह नेयह बताने के लिए देश में गुलामी हैपर्चे बांटेऔर तूने बेरोजगारी हैयह बताने के लिए हाथ काटेबडी बात बोलने का तोमुझमें दम नहीं हैलेकिन प्यारे, तू किसी शहीद से कम नहीं है।
What this episode covers
कटे हाथ | अशोक चक्रधर बगल में एक पोटली दबाएएक सिपाही थाने में घुसाऔर सहसाथानेदार को सामने पाकरसैल्यूट माराथानेदार ने पोटली की तरफ निहारासैल्यूट के झटके में पोटली भिंच गईऔर उसमें से एक गाढी-सी कत्थई बूंद रिस गईथानेदार ने पूछा:'ये पोटली में से क्या टपक रहा है ?क्या कहीं से शरबत की बोतलेंमारके आ रहा है ?सिपाही हडबढाया , हुजूर इसमें शरबत नहीं हैशरबत नहीं हैतो घबराया क्यों है, हद हैशरबत नहीं है, तो क्या शहद है?सिपाही कांपा, शर शहद भी नहीं हैइसमें से तोकुछ और ही चीज बही हैऔर ही चीज, तो खून है क्?अबे जल्दी बताक्या किसी मुर्गे की गरदन मरोड़ दीक्या किसी मेमने की टांग तोड़ दीअगर ऐसा है तो बहुत अच्छा हैपकाएंगेहम भी खाएंगे, तुझे भी खिलाएंगे!सिपाही घिघियायासर! न पका सकता हूं, न खा सकता हूंमैं तो बस आपको दिखा सकता हूंइतना कहकर सिपाही ने मेज पर पोटली खोलीदेखते ही, थानेदार की आत्मा भी डोलीपोटली से निकलेकिसी नौजवान के दो कटे हुए हाथथानेदार ने पूछाए , बता क्या है बातयह क्या कलेस है ?सिपाही बोला, हुजूर!रेलवे लाइन एक्सीडेंट का केस हैएक्सीडेंट का केस है।तो यहां क्यों लाया है,और बीस परसेंट बाडी ले आया है।एट़टी परसेंट कहां छोड़ आया है।सिपाही ने कहा, माई-बापयह बंदा इसलिए तो शर्मिंदा हैक्योंकि एट्टी परसेंट बाडी तो जिंदा हैपूरी लाश होती तो यहां क्यों लातावहीं उसका पंचनामा न बनातालेकिन गजब बहुत बड़ा हो गयावह तो हाथ कटवा के खड़ा हो गयारेल गुजर गई तो मैं दौडावह तो तना था मानिंदे हथौडामुझे देखकर मुसकराने लगाऔर अपनी ठूंठ बाहों कोहिला-हिलाकर बताने लगाले जा, ले जाये फालतू हैं, बेकार हैंऔर बुलरा ले कहां पत्रकार हैं ?मैं उन्हें बताऊंगा कि काट दिएइसलिए किमैंने झेला है भूख और गरीबी काएक लंबा सिलसिलापंद्रह वर्ष हो गएइन हाथों को कोई काम ही नहीं मिलाहां, इसलिए-इसलिएमैंने सोचा कि फालतू हैंइन्हें काट दूंऔर इस सोए हुए जनतंत्र केआलसी पत्रकारों कोलिखने के लिए प्लाट दूंप्लाट दूं कि इन कटे हाथों कोपंद्रह साल सेरोजी-रोटी की तलाश हैआदमी जिंदा है औरये उसकी तलाश की लाश है।इसे उठा लेअरे, इन दोनों हाथों को उठा लेकटवा के भी मैं तो जिंदा हूंतू क्यो मर गया ?हुजूर, इतना सुनकर मैं तो डर गयाजिन्न है या भूतमैने किसी तरह अपने-आपको साधाहाथों को झटके से उठायापोटली में बांधाऔर यहां चला आयाहुजूर, अब मुझे न भेजेंऔर इन हाथों को भीआप ही सहेजें।थानेदार चकरा गयाशायद कटे हाथ देखकर घबरा गयाबोला, इन्हें मेडिकल कालेज ले जा,लडके इन्हें देखकर डरेंगे नहींइनकी चीर-फाड़ करके स्टडी करेंगे।इसके बाद पता नहीं क्या हुआलेकिन घटना ने मन को छुआअरे उस पढ़े लिखे नौजवान नेअपने हाथों को खो दियाऔर सच कहता हूं अखबार मेंयह खबर पढ़कर मैं रो दिया।सोचने लगाकि इसे पढ़करतथाकथित बडे लोगशर्म से क्यों नही गड़ गएदेखिए, आज एक अकेले पेट के लिएदो हाथ भी कम हो गए।वह उकता गया झूठे वादों, झूठी बातों से,वरना क्या नहीं कर सकता थाअपने हाथों सेवह इन हाथों से किसी मकान कानक्शा बना सकता थाहाथों में बंदूक थामकरदेश को सुरक्षा दिला सकता था।इन हाथों से वह कोईसडक बना सकता थाऔर तो औरब्लैक बोर्ड पर 'ह' से हाथ लिखकरबच्चों को पढ़ा सकता था,मैं सोचता हूंइन्हीं हाथों से उसे बचपन मेंतिमाही, छमाही, सालाना परीक्षाएं दी होंगी,मां ने पास होने की दुआएं की होंगी।इन्हीं हाथों से वहप्रथम श्रेणी में पास होने कीखबर लाया होगा,इन्हीं हाथों से उसनेखुशी का लड़डू खाया होगा।इन्हीं हाथों में डिग्रियां सहेजी होंगीइन्हीं हाथों से अर्जियां भेजी होंगी।और अगर काम पा जातातो यह नपूताइन्हीं हाथों से मां के पांव भी छूताखुशी में इन हाथों से ढपली बजाताऔर किसी खास रात कोइन्हीं हाथों सेदुलहन का घूंघट उठाता।इन्हीं हाथों से झुनझुना बजाकरबेटी को बहलातारोते हुए बेटे के गाल सहलातातूने तो काट लिए मेरे दोस्तलेकिन तू कायर नहीं हैकायर तो तब होताजब समूचा कट जाताऔर देश के रास्ते सेहमेशा-हमेशा को हट जातासरदार भगत सिंह नेयह बताने के लिए देश में गुलामी हैपर्चे बांटेऔर तूने बेरोजगारी हैयह बताने के लिए हाथ काटेबडी बात बोलने का तोमुझमें दम नहीं हैलेकिन प्यारे, तू किसी शहीद से कम नहीं है।
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