EPISODE · Sep 26, 2025 · 1 MIN
Khidki Par Subah | TS Eliot | Translation - Dharmvir Bharti
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
खिड़की पर सुबह | टी. एस. एलियटअनुवाद : धर्मवीर भारतीनीचे के बावर्चीख़ाने में खड़क रही हैं नाश्ते की तश्तरियाँऔर सड़क के कुचले किनारों के बग़ल-बग़ल—मुझे जान पड़ता है—कि गृहदासियों की आर्द्र आत्माएँअहातों के फाटकों पर अंकुरित हो रही हैं, विषाद भरीकुहरे की भूरी लहरें ऊपर मुझ तक उछाल रही हैं।सड़क के तल्ले से तुड़े मुड़े हुए चेहरेऔर मैले कपड़ों में एक गुज़रने वाली का आँसूऔर एक निरुद्देश्य मुस्कान जो हवा में चक्कर काटती हैऔर छतों की सतह पर फैलती-फैलती विलीन हो जाती है।
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खिड़की पर सुबह | टी. एस. एलियटअनुवाद : धर्मवीर भारतीनीचे के बावर्चीख़ाने में खड़क रही हैं नाश्ते की तश्तरियाँऔर सड़क के कुचले किनारों के बग़ल-बग़ल—मुझे जान पड़ता है—कि गृहदासियों की आर्द्र आत्माएँअहातों के फाटकों पर अंकुरित हो रही हैं, विषाद भरीकुहरे की भूरी लहरें ऊपर मुझ तक उछाल रही हैं।सड़क के तल्ले से तुड़े मुड़े हुए चेहरेऔर मैले कपड़ों में एक गुज़रने वाली का आँसूऔर एक निरुद्देश्य मुस्कान जो हवा में चक्कर काटती हैऔर छतों की सतह पर फैलती-फैलती विलीन हो जाती है।
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Khidki Par Subah | TS Eliot | Translation - Dharmvir Bharti
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