EPISODE · May 23, 2020 · 2 MIN
कविता: 'थोड़ी तकलीफ तो होगी पर सह लेंगे'
from Pod Khaas · host Aaj Tak Radio
कोरोना के इस दौर में हम सब घरों में क़ैद रहने को मजबूर हैं लेकिन ये क़ैद नए सिरे से जीवन शुरू होने की उम्मीद है. ये महामारी जल्द ख़त्म होगी और हम सब अपने-अपने घरों पर रहेंगे. और दोबारा सब गुलज़ार होगा. रितु राज की ये कविता इसी उम्मीद का ढांढस बंधाती है. सुनिए अमन गुप्ता की आवाज़ में.
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कोरोना के इस दौर में हम सब घरों में क़ैद रहने को मजबूर हैं लेकिन ये क़ैद नए सिरे से जीवन शुरू होने की उम्मीद है. ये महामारी जल्द ख़त्म होगी और हम सब अपने-अपने घरों पर रहेंगे. और दोबारा सब गुलज़ार होगा. रितु राज की ये कविता इसी उम्मीद का ढांढस बंधाती है. सुनिए अमन गुप्ता की आवाज़ में.
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