EPISODE · May 8, 2020 · 2 MIN
कविता: ट्रेन की पटरियां सोने के लिए नहीं बनीं, लेकिन..
from Pod Khaas · host Aaj Tak Radio
पैदल अपने घर की ओर जाते थके हुए लोगों की लाशें, रेल की पटरियों पर आपने देखीं. घर जा रहे थे कुछ मज़दूर. थककर पटरियों पर सो गए और कब मालगाड़ी आई, उन्हें पता नहीं लगा. सोलह जानें गईं. त्रासदियों के इस समय में दिल तोड़ देने वाली इससे बदसूरत तस्वीर हमने नहीं देखीं. पटरियों पर क्यों सो गए वो लोग? अफ़सोस होता है. पर इसे एक सवाल के तौर पर इस कविता में पेश किया है इंडिया टुडे डिजिटल के मैनेजिंग एडिटर कमलेश सिंह ने. आवाज़ कुलदीप मिश्र की. साउंड मिक्सिंग की कपिल देव सिंह ने और थंबनेल पर लगी तस्वीर खींची है शेकर घोष ने.
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पैदल अपने घर की ओर जाते थके हुए लोगों की लाशें, रेल की पटरियों पर आपने देखीं. घर जा रहे थे कुछ मज़दूर. थककर पटरियों पर सो गए और कब मालगाड़ी आई, उन्हें पता नहीं लगा. सोलह जानें गईं. त्रासदियों के इस समय में दिल तोड़ देने वाली इससे बदसूरत तस्वीर हमने नहीं देखीं. पटरियों पर क्यों सो गए वो लोग? अफ़सोस होता है. पर इसे एक सवाल के तौर पर इस कविता में पेश किया है इंडिया टुडे डिजिटल के मैनेजिंग एडिटर कमलेश सिंह ने. आवाज़ कुलदीप मिश्र की. साउंड मिक्सिंग की कपिल देव सिंह ने और थंबनेल पर लगी तस्वीर खींची है शेकर घोष ने.
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