EPISODE · Feb 8, 2025 · 3 MIN
Labour Chowk | Shivam Chaubey
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
लेबर चौक | शिवम चौबेकठरे में सूरज ढोकर लाते हुएगमछे में कन्नी, खुरपी, छेनी, हथौड़ी बाँधे हुएरूखे-कटे हाथों से समय को धरकेलते हुएपुलिस चौकी और लाल चौक के ठीक बीचजहाँ रोज़ी के चार रास्ते खुलते हैऔर कई बंद होते हैंजहाँ छतनाग से, अंदावा से, रामनाथपुर सेजहाँ मुस्तरी या कुजाम सेमुंगेरया आसाम सेपूंजीवाद की आंत में अपनी ज़मीनों को पचता देखअगली सुबहग़रीबी की गद्दी पर बैठ विकास की ट्टही साईकिल पे सवारकई-कई मज़दूर आते हैंवहीं है लेबर चौराहाकई शहरों में कई-कई लेबर चौराहे हैं।अल्लापुर या रामबाग मेंबनारस या कानपुर मेंदिल्ली या अमृतसर मेंहर जगह जैसे सिविल लाइन्स है, जैसे घण्टाघर है, जैसे चौक है।वैसे ही लेबर चौराहा हैइन जगहो से बहत अलगलेबर चौराहा ही है।जिसकी हथेली पे पूरा शहर टिका हैआँखों से अभिजातपने की पट्टी हटाकर देखोगे तब समझोगे किदुनिया के कोने-कोने में जहाँ-जहाँ मज़दूर हैंवहाँ -वहाँ भी होता ही है लेबर चौराहाफिर भी कितनी अजीब बात है।जिन रेलों से मज़दूर आते हैं।उनमें उनके डिब्बे सबसे कम है।जिन शहरों को बसाते हैं।उनमें उनके घर नगण्य है।जिन खेतों में अन्न उगाते हैंवहाँ उनकी भुख सबसे कम हैखदानों में, मिलों में, स्कूलों में, बाज़ारों में, अस्पतालों मेंउनके हिस्से न के बराबर हैफिर भी वे आते हैं अपना गाँव-टोला छीन लिए जाने के बादजीने के लिएगंदे पानी, गंदी हवा और गंदी व्यवस्था मेंबचे रहने के लिएउसी विकास की टूटही साईकिल पे सवार उनहें जब भी लेबर चौराहे की तरफ आताहुआ देखोउन्हें पहचानोवे हमारे पड़ोस से ही आये हैंउनसे पूछो- "का हाल बा"वे जवाब ज़रूर देगेइज़राइल या फिलिस्तीन मेंभारत या ब्राज़ील मेंजहाँ दुनिया ढहेगीपहली ईट रखने वे ही आएंगेलेकिन सोचने वाली बात ये है।कि हर बार विकास की ट्टही साईकिल पे सवारगमछे में कन्नी, खुरपी, छेनी, हथौड़ी बाँधे हुएरूखे-कटे हाथों से समय को धकेलतेहुएपुलिस चौकी और लाल चौक के ठीक बीचक्या वे इसी तरह आएंगे..?
NOW PLAYING
Labour Chowk | Shivam Chaubey
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
May 13, 2026 ·13m
May 11, 2026 ·20m
May 6, 2026 ·18m
May 4, 2026 ·15m
May 1, 2026 ·16m