EPISODE · Oct 7, 2024 · 2 MIN
Laut ti Sabhyatayein | Anjana Tandon
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
लौटती सभ्यताएँ | अंजना टंडनविश्वास की गर्दन प्रायःलटकती है संदेह की कीलों पर,“कहीं कुछ तो है” का भाव दरअसलदिमाग की दबी आवाज़ हैजो अक्सर छोड़ देती हैप्रशंसा में भी कितनी खाली ध्वनियाँ,संदेह के कानआत्ममुग्धता की रूई से बंद हैआँखें ऊगी हैं पूरी देह पर औरखून में है दुनियावी अट्टाहास ,कंठ भर तंजदिल के मर्म को कभी जान नहीं पाएगा,मृत्यु बाद ही धुले थेबुल्लेशाह ,मीरा और अमृता के दाग, वैसे तो हर सभ्यता प्रेम से जन्मती हैविश्वास पर पनपती हैऔर संदेह की हवा में सांस तोड़ती है,पर भुक्तभोगी जानते हैं कि इतिहास झुठला कर इन दिनों उसके रक्तरंजित पदचिन्ह, उल्टे पाँव लौटने के सिम्त दर्ज हो रहे है।
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लौटती सभ्यताएँ | अंजना टंडनविश्वास की गर्दन प्रायःलटकती है संदेह की कीलों पर,“कहीं कुछ तो है” का भाव दरअसलदिमाग की दबी आवाज़ हैजो अक्सर छोड़ देती हैप्रशंसा में भी कितनी खाली ध्वनियाँ,संदेह के कानआत्ममुग्धता की रूई से बंद हैआँखें ऊगी हैं पूरी देह पर औरखून में है दुनियावी अट्टाहास ,कंठ भर तंजदिल के मर्म को कभी जान नहीं पाएगा,मृत्यु बाद ही धुले थेबुल्लेशाह ,मीरा और अमृता के दाग, वैसे तो हर सभ्यता प्रेम से जन्मती हैविश्वास पर पनपती हैऔर संदेह की हवा में सांस तोड़ती है,पर भुक्तभोगी जानते हैं कि इतिहास झुठला कर इन दिनों उसके रक्तरंजित पदचिन्ह, उल्टे पाँव लौटने के सिम्त दर्ज हो रहे है।
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