EPISODE · Jan 24, 2025 · 2 MIN
Maine Poocha Kya Kar Rahi Ho | Agyeya
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मैंने पूछा क्या कर रही हो | अज्ञेय मैंने पूछायह क्या बना रही हो?उसने आँखों से कहाधुआँ पोंछते हुए कहा-मुझे क्या बनाना है! सब-कुछअपने आप बनता है।मैने तो यही जाना है।कह लो भगवान ने मुझे यही दिया है।मेरी सहानुभूति में हठ था-मैंने कहा- कुछ तो बना रही होया जाने दो, न सहीबना नहीं रहीक्या कर रही हो?वह बोली- देख तो रहे होछीलती हूँनमक छिड़कती हूँमसलती हूँनिचोड़ती हूँकोड़ती हूँकसती हूँफोड़ती हूँफेंटती हूँमहीन बिनारती हूँमसालों से सँवारती हूँदेगची में पलटती हूँबना कुछ नहीं रहीबनाता जो है - यह सही है-अपने-आप बनाता है।पर जो कर रही हूँ-एक भारी पेंदेमगर छोटे मुँह कीदेगची में सब कुछ झोंक रही हूँदबाकर अँटा रही हूँसीझने दे रही हूँ।मैं कुछ करती भी नहीं-मैं काम सलटती हूँ।मैं जो परोसूँगीजिन के आगे परोसूँगीउन्हें क्या पता हैकि मैंने अपने साथ क्या किया है?
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मैंने पूछा क्या कर रही हो | अज्ञेय मैंने पूछायह क्या बना रही हो?उसने आँखों से कहाधुआँ पोंछते हुए कहा-मुझे क्या बनाना है! सब-कुछअपने आप बनता है।मैने तो यही जाना है।कह लो भगवान ने मुझे यही दिया है।मेरी सहानुभूति में हठ था-मैंने कहा- कुछ तो बना रही होया जाने दो, न सहीबना नहीं रहीक्या कर रही हो?वह बोली- देख तो रहे होछीलती हूँनमक छिड़कती हूँमसलती हूँनिचोड़ती हूँकोड़ती हूँकसती हूँफोड़ती हूँफेंटती हूँमहीन बिनारती हूँमसालों से सँवारती हूँदेगची में पलटती हूँबना कुछ नहीं रहीबनाता जो है - यह सही है-अपने-आप बनाता है।पर जो कर रही हूँ-एक भारी पेंदेमगर छोटे मुँह कीदेगची में सब कुछ झोंक रही हूँदबाकर अँटा रही हूँसीझने दे रही हूँ।मैं कुछ करती भी नहीं-मैं काम सलटती हूँ।मैं जो परोसूँगीजिन के आगे परोसूँगीउन्हें क्या पता हैकि मैंने अपने साथ क्या किया है?
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