EPISODE · Feb 7, 2023 · 24 MIN
Manmath Nath Gupt - Azad Hind
from RADIO AZAD HIND 90.8 FM · host Radio Azad
मन्मथनाथ गुप्त भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी तथा सिद्धहस्त लेखक थे। उन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी तथा बांग्ला में आत्मकथात्मक, ऐतिहासिक एवं गल्प साहित्य की रचना की है। वे मात्र १३ वर्ष की आयु में ही स्वतन्त्रता संग्राम में कूद गये और जेल गये। बाद में वे हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सक्रिय सदस्य भी बने और १७ वर्ष की आयु में उन्होंने सन् १९२५ में हुए काकोरी काण्ड में सक्रिय रूप से भाग लिया। उनकी असावधानी से ही इस काण्ड में अहमद अली नाम का एक रेल-यात्री मारा गया जिसके कारण ४ लोगों को फाँसी की सजा मिली जबकि मन्मथ की आयु कम होने के कारण उन्हें मात्र १४ वर्ष की सख्त सजा दी गयी। १९३७ में जेल से छूटकर आये तो फिर क्रान्तिकारी लेख लिखने लगे जिसके कारण उन्हें १९३९ में फिर सजा हुई और वे भारत के स्वतन्त्र होने से एक वर्ष पूर्व १९४६ तक जेल में रहे। स्वतन्त्र भारत में वे योजना, बाल भारती और आजकल नामक हिन्दी पत्रिकाओं के सम्पादक भी रहे। नई दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ईस्ट में अपने निवास पर २६ अक्टूबर २००० को दीपावली के दिन उनका जीवन-दीप बुझ गया। क्रान्तिकारी आन्दोलन के एक क्रियाशील सदस्य रहे, जिन दिनों की चर्चा बाद में उन्होंने अपनी पुस्तक 'क्रान्तियुग के संस्मरण' में की है। वे संस्मरण इतिहास के साथ-साथ अकाल्पनिक गद्य-शैली के अच्छे नमूने भी हैं। आपने क्रान्तिकारी आन्दोलन का एक विधिवत इतिहास भी प्रस्तुत किया है - भारत में सशस्त्र क्रान्तिकारी चेष्टा का इतिहास (प्रकाशन वर्ष:1939 ई.)।
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