Mann Ke Jheel Mein | Shashiprabha Tiwari episode artwork

EPISODE · Oct 8, 2024 · 2 MIN

Mann Ke Jheel Mein | Shashiprabha Tiwari

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

मन के झील में | शशिप्रभा तिवारीआज फिर  तुम्हारे मन के झील की परिक्रमा कर रही हूं धीरे-धीरे यादों की पगडंडी पर गुज़रते  हुए वह पीपल का पुराना पेड़ याद आया उसके छांव में बैठ कर मुझसे बहुत सी बातें तुम करते थे मेरे कानों में बहुत कुछ कह जाते जो नज़रें मिला कर नहीं कह पाते थे क्या करूं गोविन्द!बहुत रोकती हूंमन कहा नहीं मानता तुम द्वारका वासीमैं बरसाने में बैठीतुम्हें घड़ी-घड़ी सुमरती हूं।अनायास, बंशी की धुन गूंजने लगती है मेरे आस-पास मेरा रोम-रोम फिर, नाचने लगता है और मैं भी गुनगुनाने लगती हूं तुम प्रेम होतुम प्रीत होतुम मनमीत होमनमोहन, इसी प्रीत की रीत कोनिभाया है, मैंने और धीरे धीरे मन के झील में तुम्हें निहार कर अपने मिलन केनए सपने फिर संजोकर नयनों को मूंदकर खुद में तुम कोसमा लेती हूं और तुम्हारे भीतर मैं विलीन हो गईफिर, मैं मैं नहीं रही राधेश्याम बन गई।राधे राधे, श्याम।

मन के झील में | शशिप्रभा तिवारीआज फिर  तुम्हारे मन के झील की परिक्रमा कर रही हूं धीरे-धीरे यादों की पगडंडी पर गुज़रते  हुए वह पीपल का पुराना पेड़ याद आया उसके छांव में बैठ कर मुझसे बहुत सी बातें तुम करते थे मेरे कानों में बहुत कुछ कह जाते जो नज़रें मिला कर नहीं कह पाते थे क्या करूं गोविन्द!बहुत रोकती हूंमन कहा नहीं मानता तुम द्वारका वासीमैं बरसाने में बैठीतुम्हें घड़ी-घड़ी सुमरती हूं।अनायास, बंशी की धुन गूंजने लगती है मेरे आस-पास मेरा रोम-रोम फिर, नाचने लगता है और मैं भी गुनगुनाने लगती हूं तुम प्रेम होतुम प्रीत होतुम मनमीत होमनमोहन, इसी प्रीत की रीत कोनिभाया है, मैंने और धीरे धीरे मन के झील में तुम्हें निहार कर अपने मिलन केनए सपने फिर संजोकर नयनों को मूंदकर खुद में तुम कोसमा लेती हूं और तुम्हारे भीतर मैं विलीन हो गईफिर, मैं मैं नहीं रही राधेश्याम बन गई।राधे राधे, श्याम।

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Mann Ke Jheel Mein | Shashiprabha Tiwari

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This episode is 2 minutes long.

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This episode was published on October 8, 2024.

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मन के झील में | शशिप्रभा तिवारीआज फिर  तुम्हारे मन के झील की परिक्रमा कर रही हूं धीरे-धीरे यादों की पगडंडी पर गुज़रते  हुए वह पीपल का पुराना पेड़ याद आया उसके छांव में बैठ कर मुझसे बहुत सी बातें तुम करते थे मेरे कानों में बहुत कुछ कह जाते जो नज़रें...

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