EPISODE · Mar 30, 2026 · 2 MIN
Maut Bhi Jaise Khafa Ho Humse | Talat Siddiqui Natori
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मौत भी हम से ख़फ़ा हो जैसे। तलअत सिद्दीक़ी नह्टोरीमौत भी हम से ख़फ़ा हो जैसेज़िंदगी एक सज़ा हो जैसेदिल के वीराने में वो यूँ आएफूल सहरा में खिला हो जैसेअपनी बर्बादी पे शर्मिंदा हूँये भी मेरी ही ख़ता हो जैसेअहमियत ये है तुम्हारे ख़त कीमेरी क़िस्मत का लिखा हो जैसेदिल मिरा यूँ हुआ पारा-पाराआइना टूट गया हो जैसेतुम मुझे हाथ उठा कर कोसोकोई मसरूफ़-ए-दुआ* हो जैसेमसरूफ़-ए-दुआ: प्रार्थना में व्यस्तउन के चेहरे पे वो अश्कों की नमीफूल शबनम से धुला हो जैसेबे-वजह मुझ से बिगड़ बैठे हैंमैं ने कुछ उन को कहा हो जैसेन तवज्जो न पयाम और सलाममुझ से वो रूठ गया हो जैसेमौज-ए-बेबाक* की मानिंद* हैं वोकोई तूफ़ाँ में पला हो जैसेमौज-ए-बेबाक: स्वतंत्र लहरमानिंद: की तरहवो ख़फ़ा हो के बहुत शरमाएआइना देख लिया हो जैसेऐसे अंजान बने वो 'तलअ'त'मेरा शिकवा न सुना हो जैसे
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