EPISODE · Apr 6, 2023 · 3 MIN
Mera Ghanisht Padosi - Kunwar Narayan
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
19 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद में जन्में कुँवर नारायण समकालीन कविता के अग्रणी कवि हैं। उनका पहला कविता-संग्रह ‘चक्रव्यूह’ 1956 में प्रकाशित हुआ था। 1959 में उन्हें अज्ञेय के संपादन में प्रकाशित ‘तीसरा सप्तक’ में शामिल किया गया। 15 नवंबर 2017 में लखनऊ में उनका निधन हुआ। मेरा घनिष्ठ पड़ोसी - कुँवर नारायण मेरा घनिष्ठ पड़ोसी हैएक पुराना पेड़- न जाने क्या तो है उसका नाम, क्या उसकी जात-पर इतना निकट है कि उसकी डालेंहमेशा बनी ही रहती हैंमेरे घर के वराण्डे मेंकुछ इस तरह कि जब चाहताहाथ बढ़ा कर सहला सकता उसका माथाऔर वह गऊ-सामुझे निहारता रहता निरीह आँखों सेमेरी उससे गाढ़ी दोस्ती हो गई हैइतनी कि जब हवा चलतीतो लगता वह मेरा नाम लेकरमुझे बुला रहा,सुबह की धूप जब उसे जगातीवह बाबा की तरह खखारते हुए उठताऔर मुझे भी जगा देता।अकसर हम घण्टों बातें करतेइधर-उधर की बातेंअपनी-अपनी भाषा में...लेकिन भाषा से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता-वह कहता-हमारे सुख-दुख की भाषा एक ही है,जाड़ा गर्मी बरसात उसे भी उसी तरह भासते जैसे मुझे,पतझर की उदासीवसन्त का उल्लासकितनी ही बार हमने साथ मनाया हैएक दूसरे के जन्मदिन की तरह...जब भी बैठ जाता हूँ थक करउसकी बगल मेंचाहे दिन हो चाहे रातवह ध्यान से सुनता है मेरी बातों को,कहता कुछ नहींबस, एक नया सवेरा देता है मेरी बेचैन रातों कोउसकी बाँहों में चिड़ियों का बसेरा है,हर घड़ी लगा रहता उनका आना-जाना...कभी-कभी जब अपना ही घर समझ करमेरे घर में आकर ठहर जाते हैंउसके मेहमान-तो लगता चिड़ियों का घोंसला है मेरा मकान,और एक भागती ऋतु भर की सजावट है मेरा सामान...प्रतिदिन एक कविता Whatsapp लिंक https://chat.whatsapp.com/HaxCc1qgeZaGE8YPfw42Ge
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