EPISODE · Sep 3, 2023 · 2 MIN
Mere Sapne Bahut Nahi Hain | Girija Kumar Mathur
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मेरे सपने बहुत नहीं हैं | गिरिजा कुमार माथुरमेरे सपने बहुत नहीं हैंछोटी-सी अपनी दुनिया हो,दो उजले-उजले से कमरेजगने को, सोने को,मोती-सी हों चुनी किताबेंशीतल जल से भरे सुनहले प्यालों जैसीठण्डी खिड़की से बाहर धीरे हँसती होतितली-सी रंगीन बग़ीचीछोटा लॉन स्वीट-पी जैसा,मौलसिरी की बिखरी छितरी छाँहों डूबाहम हों, वे होंकाव्य और संगीत-सिन्धु में डूबे-डूबेप्यार भरे पंछी से बैठेनयनों से रस-नयन मिलाए,हिल-मिलकर करते होंमीठी-मीठी बातें…उनकी लटें हमारे कन्धों पर मुख परउड़-उड़ जाती हों,सुशर्म बोझ से दबे हुए झोंकों से हिलकरअब न बहुत हैं सपने मेरेमैं इस मंज़िल पर आकरसब कुछ जीवन में भर पाया।
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