EPISODE · Mar 30, 2021 · 9 MIN
मेरी माँ हमेशा कहती थी। My Mom always used to say
from Heart2Heart TALK
मेरी माँ हमेशा कहती थी। My Mom always used to say|ये एक प्रेरक संवाद हैं मनुष्य और उसकी आत्मा का यहाँ प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया हैं। आशा हैं आपको पसंद आएगा | माँ हमेशा कहती थी की जीवन में जब सारे रास्ते बंद हो जाये तब एक रास्ता हमेशा खुला होता हैं। और उस रस्ते पर चलनेवाला कभी भी निराश और खाली हाथ नहीं लौटता। आज उस रस्ते पर भी चल कर देख लेते हैं। जानते हो दोस्तों वो रास्ता हैं भीतर की आवाज़ का , जब हम दुनिया की भीड़ में चलते चलते थक जाए, जीत और हार के खेल खेलते हुए :tbt sttB, n;ttNt ntu sttB तब हमारे सामने सिर्फ एक ही मार्ग होता हैं परमपिता परमात्मा का। आज सीढ़ी उतरकर यही पूछना हैं, mtkmtth btuk Jttu btltqMgt खुश कैसे हैं जिनके पास ना दुनिया की दौलत हैं , शोहरत हैं कुछ भी तो नहीं हैं। ytst btuhu vttmt vt{tuvtxeomt nI, ctulfctujtulmt, rctjzekdtu nI, ctuldtjttumt nI, vth मैं ज़िन्दगी में जिस शांति की तलाश में भटकता रहा जिस चैन सुकून के लिए तरसता रहा वो मुझे fCte नहीं मिला और उनको gtu mtct कैसे मिल गया। ये आपका कैसा न्याय हैं जो कभी आपके मंदिर mteZegttk ltnek atZt rstmtltu ytvtfu mttbtltu fCte nt:t ltne sttuz,u जिसने कभी आपकी पूजा , अर्चना नहीं की नाहीं कभी आपकी चौखट पर सर हि झुकाया। Qlnu, Nttkr;t, ytltk’ सब कुछ कैसे मिल गया जिसके लिए ये दुनिया के लोग मन्नते मानते हैं , व्रत उपवास रखते हैं। आपकी महाआरती , कथा , यज्ञ और ना जाने आपके नाम से कितने भव्य पांडाल रचे जाते हैं। Mujhe Wo Shanti……Wo Sukoon….. Jttu vthbt mtwFt btwLu fgtw vt{tv;t ltnek nwyt ?
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मेरी माँ हमेशा कहती थी। My Mom always used to say|ये एक प्रेरक संवाद हैं मनुष्य और उसकी आत्मा का यहाँ प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया हैं। आशा हैं आपको पसंद आएगा | माँ हमेशा कहती थी की जीवन में जब सारे रास्ते बंद हो जाये तब एक रास्ता हमेशा खुला होता हैं। और उस रस्ते पर चलनेवाला कभी भी निराश और खाली हाथ नहीं लौटता। आज उस रस्ते पर भी चल कर देख लेते हैं। जानते हो दोस्तों वो रास्ता हैं भीतर की आवाज़ का , जब हम दुनिया की भीड़ में चलते चलते थक जाए, जीत और हार के खेल खेलते हुए :tbt sttB, n;ttNt ntu sttB तब हमारे सामने सिर्फ एक ही मार्ग होता हैं परमपिता परमात्मा का। आज सीढ़ी उतरकर यही पूछना हैं, mtkmtth btuk Jttu btltqMgt खुश कैसे हैं जिनके पास ना दुनिया की दौलत हैं , शोहरत हैं कुछ भी तो नहीं हैं। ytst btuhu vttmt vt{tuvtxeomt nI, ctulfctujtulmt, rctjzekdtu nI, ctuldtjttumt nI, vth मैं ज़िन्दगी में जिस शांति की तलाश में भटकता रहा जिस चैन सुकून के लिए तरसता रहा वो मुझे fCte नहीं मिला और उनको gtu mtct कैसे मिल गया। ये आपका कैसा न्याय हैं जो कभी आपके मंदिर mteZegttk ltnek atZt rstmtltu ytvtfu mttbtltu fCte nt:t ltne sttuz,u जिसने कभी आपकी पूजा , अर्चना नहीं की नाहीं कभी आपकी चौखट पर सर हि झुकाया। Qlnu, Nttkr;t, ytltk’ सब कुछ कैसे मिल गया जिसके लिए ये दुनिया के लोग मन्नते मानते हैं , व्रत उपवास रखते हैं। आपकी महाआरती , कथा , यज्ञ और ना जाने आपके नाम से कितने भव्य पांडाल रचे जाते हैं। Mujhe Wo Shanti……Wo Sukoon….. Jttu vthbt mtwFt btwLu fgtw vt{tv;t ltnek nwyt ?
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