Mithai Banane Wale | Shashwat Upadhyay episode artwork

EPISODE · Jan 20, 2024 · 2 MIN

Mithai Banane Wale | Shashwat Upadhyay

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

मिठाई बनाने वाले | शाश्वत उपाध्याय जब दुनिया बनीतो सबसे पहले बने मिठाई बनाने वालेहाथों में भर भर के चीनी की परतपरत भी ऐसी वैसी नहींएकदम गूलर का फूल छुआ केजितना खर्च हो, उतना बढ़ेउंगली के पोरों में घी का कनस्तर,कनस्तर भी वही गूलर के फूलों वालाआँखों में परख,परख भी एकदम पाग चिन्ह लेने वालीइतने सब के बादबोली तो मीठी होनी ही थीसो भी है।लेकिन कलेजा?मठूस हलवाई कहीं का,बचपन में ही काले रसगुल्ले की कीमतआसमान पर रखे थासात रुपया पीसआते जाते स्कूल,मन मार कर साइकिल चलाते लड़कों में,नौकरी की पहली ललक तुम्हारे रसगुल्ले के रेट ने ही तो लगाईसात रुपया पीसरसगुल्ला है कि कलेजे का टुकड़ा तुम्हारे?और समोसा,वह भी हर साल एक रुपये महंगाबहाना तो देखो,महंगाई बढ़ रहीलौंगलत्ता तो ऐसे,जैसे सोखा का लौंग डाले हो ओझइती करकेक्या सोचे हो?कि शो-केश के उस पार की सारी मिठाई तुम्हारी बपौती हैं?सो तो हैं।लेकिन,एक दिन जब होंगे लायकतो ज़रूर देह में घुल चुकी होगी चीनी की परत।जिंदगी उबले हुए आलू को सोख रही होगी।और ज़बान में लड़खड़ाहट भी होगी।फिर भी,किसी दिन आ करतुम्हारी दुकान की सारी मिठाई खा जाएंगेफिर देह में घुल चुकी शर्करा के पार जा करभगवान से आश्वासन लेंगेकिअगली बारलड़की बनानाजिसके पिता और पति दोनों कीअपनी मिठाई की दुकान हो।

मिठाई बनाने वाले | शाश्वत उपाध्याय जब दुनिया बनीतो सबसे पहले बने मिठाई बनाने वालेहाथों में भर भर के चीनी की परतपरत भी ऐसी वैसी नहींएकदम गूलर का फूल छुआ केजितना खर्च हो, उतना बढ़ेउंगली के पोरों में घी का कनस्तर,कनस्तर भी वही गूलर के फूलों वालाआँखों में परख,परख भी एकदम पाग चिन्ह लेने वालीइतने सब के बादबोली तो मीठी होनी ही थीसो भी है।लेकिन कलेजा?मठूस हलवाई कहीं का,बचपन में ही काले रसगुल्ले की कीमतआसमान पर रखे थासात रुपया पीसआते जाते स्कूल,मन मार कर साइकिल चलाते लड़कों में,नौकरी की पहली ललक तुम्हारे रसगुल्ले के रेट ने ही तो लगाईसात रुपया पीसरसगुल्ला है कि कलेजे का टुकड़ा तुम्हारे?और समोसा,वह भी हर साल एक रुपये महंगाबहाना तो देखो,महंगाई बढ़ रहीलौंगलत्ता तो ऐसे,जैसे सोखा का लौंग डाले हो ओझइती करकेक्या सोचे हो?कि शो-केश के उस पार की सारी मिठाई तुम्हारी बपौती हैं?सो तो हैं।लेकिन,एक दिन जब होंगे लायकतो ज़रूर देह में घुल चुकी होगी चीनी की परत।जिंदगी उबले हुए आलू को सोख रही होगी।और ज़बान में लड़खड़ाहट भी होगी।फिर भी,किसी दिन आ करतुम्हारी दुकान की सारी मिठाई खा जाएंगेफिर देह में घुल चुकी शर्करा के पार जा करभगवान से आश्वासन लेंगेकिअगली बारलड़की बनानाजिसके पिता और पति दोनों कीअपनी मिठाई की दुकान हो।

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How long is this episode of Pratidin Ek Kavita?

This episode is 2 minutes long.

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This episode was published on January 20, 2024.

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मिठाई बनाने वाले | शाश्वत उपाध्याय जब दुनिया बनीतो सबसे पहले बने मिठाई बनाने वालेहाथों में भर भर के चीनी की परतपरत भी ऐसी वैसी नहींएकदम गूलर का फूल छुआ केजितना खर्च हो, उतना बढ़ेउंगली के पोरों में घी का कनस्तर,कनस्तर भी वही गूलर के फूलों वालाआँखों...

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