Mom Ka Ghoda | Dushyant Kumar episode artwork

EPISODE · Jul 29, 2025 · 2 MIN

Mom Ka Ghoda | Dushyant Kumar

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

मोम का घोड़ा | दुष्यंत कुमारमैने यह मोम का घोड़ा,बड़े जतन से जोड़ा,रक्त की बूँदों से पालकरसपनों में ढालकरबड़ा किया,फिर इसमें प्यास और स्पंदनगायन और क्रंदनसब कुछ भर दिया,औ’ जब विश्वास हो गया पूराअपने सृजन पर,तब इसे लाकरआँगन में खड़ा किया!माँ ने देखा—बिगड़ीं;बाबूजी गरम हुए;किंतु समय गुज़रा...फिर नरम हुए।सोचा होगा—लड़का है,ऐसे ही स्वाँग रचा करता है।मुझे भरोसा था मेरा है,मेरे काम आएगा।बिगड़ी बनाएगा।किंतु यह घोड़ाकायर था थोड़ा,लोगों को देखकर बिदका, चौंका,मैंने बड़ी मुश्किल से रोका।और फिर हुआ यहसमय गुज़रा, वर्ष बीते,सोच कर मन में—हारे या जीते,मैने यह मोम का घोड़ा,तुम्हें बुलाने कोअग्नि की दिशाओं को छोड़ा।किंतु जैसे ये बढ़ाइसकी पीठ पर पड़ाआकरलपलपाती लपटों का कोड़ा,तब पिघल गया घोड़ाऔर मोम मेरे सब सपनों पर फैल गया!

मोम का घोड़ा | दुष्यंत कुमारमैने यह मोम का घोड़ा,बड़े जतन से जोड़ा,रक्त की बूँदों से पालकरसपनों में ढालकरबड़ा किया,फिर इसमें प्यास और स्पंदनगायन और क्रंदनसब कुछ भर दिया,औ’ जब विश्वास हो गया पूराअपने सृजन पर,तब इसे लाकरआँगन में खड़ा किया!माँ ने देखा—बिगड़ीं;बाबूजी गरम हुए;किंतु समय गुज़रा...फिर नरम हुए।सोचा होगा—लड़का है,ऐसे ही स्वाँग रचा करता है।मुझे भरोसा था मेरा है,मेरे काम आएगा।बिगड़ी बनाएगा।किंतु यह घोड़ाकायर था थोड़ा,लोगों को देखकर बिदका, चौंका,मैंने बड़ी मुश्किल से रोका।और फिर हुआ यहसमय गुज़रा, वर्ष बीते,सोच कर मन में—हारे या जीते,मैने यह मोम का घोड़ा,तुम्हें बुलाने कोअग्नि की दिशाओं को छोड़ा।किंतु जैसे ये बढ़ाइसकी पीठ पर पड़ाआकरलपलपाती लपटों का कोड़ा,तब पिघल गया घोड़ाऔर मोम मेरे सब सपनों पर फैल गया!

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Mom Ka Ghoda | Dushyant Kumar

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This episode is 2 minutes long.

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This episode was published on July 29, 2025.

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मोम का घोड़ा | दुष्यंत कुमारमैने यह मोम का घोड़ा,बड़े जतन से जोड़ा,रक्त की बूँदों से पालकरसपनों में ढालकरबड़ा किया,फिर इसमें प्यास और स्पंदनगायन और क्रंदनसब कुछ भर दिया,औ’ जब विश्वास हो गया पूराअपने सृजन पर,तब इसे लाकरआँगन में खड़ा किया!माँ ने...

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