EPISODE · Aug 17, 2024 · 2 MIN
Mrityu | Vishwanath Prasad Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मृत्यु - विश्वनाथ प्रसाद तिवारी मेरे जन्म के साथ ही हुआ थाउसका भी जन्म...मेरी ही काया में पुष्ट होते रहेउसके भी अंगमें जीवन-भर सँवारता रहा जिन्हेंऔर ख़ुश होता रहाकि ये मेरे रक्षक अस्त्र हैंदरअसल वे उसी के हथियार थेअजेय और आज़माये हुएमैं जानता थाकि सब कुछ जानता हूँमगर सच्चाई यह थीकि मैं नहीं जानता थाकि कुछ नहीं जानता हूँ...मैं सोचता था फतह कर रहा हूँ किले पर किले मगर जितना भी और जिधर भी बढ़ता थाउसी के करीब और उसी की दिशा मेंवक्त निकल चुका था दूर।जब मुझे उसके षड्यंत्र का अनुभव हुआआख़िरी बार -जब उससे बचने के लिएमें भाग रहा थातेज़ और तेज़ और अपनी समझ सेसुरक्षित पहुँच गया जहाँवहाँ वह मेरी प्रतीक्षा में .पहले से खड़ी थी..मेरी मृत्यु|
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मृत्यु - विश्वनाथ प्रसाद तिवारी मेरे जन्म के साथ ही हुआ थाउसका भी जन्म...मेरी ही काया में पुष्ट होते रहेउसके भी अंगमें जीवन-भर सँवारता रहा जिन्हेंऔर ख़ुश होता रहाकि ये मेरे रक्षक अस्त्र हैंदरअसल वे उसी के हथियार थेअजेय और आज़माये हुएमैं जानता थाकि सब कुछ जानता हूँमगर सच्चाई यह थीकि मैं नहीं जानता थाकि कुछ नहीं जानता हूँ...मैं सोचता था फतह कर रहा हूँ किले पर किले मगर जितना भी और जिधर भी बढ़ता थाउसी के करीब और उसी की दिशा मेंवक्त निकल चुका था दूर।जब मुझे उसके षड्यंत्र का अनुभव हुआआख़िरी बार -जब उससे बचने के लिएमें भाग रहा थातेज़ और तेज़ और अपनी समझ सेसुरक्षित पहुँच गया जहाँवहाँ वह मेरी प्रतीक्षा में .पहले से खड़ी थी..मेरी मृत्यु|
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