Nadi Kabhi Nahi Sookhti | Damodar Khadse episode artwork

EPISODE · Apr 10, 2024 · 3 MIN

Nadi Kabhi Nahi Sookhti | Damodar Khadse

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

नदी कभी नहीं सूखती | दामोदर खड़से पौ फटने से पहलेसारी बस्ती हीगागर भर-भरकरअपनी प्यासबुझाती रहीफिर भीनदी कुँवारी ही रहीक्योंकि,नदी कभी नहीं सूखती नदी, इस बस्ती की पूर्वज है!पीढ़ियों के पुरखेइसी नदी मेंडुबकियाँ लगाकरअपना यौवनजगाते रहेसूर्योदय से पहलेसतह पर उभरे कोहरे मेंअंजुरी भर अनिष्ट अँधेरानदी में बहाते रहेहर शामबस्ती की स्त्रियाँअपनी मन्नतों के दीयेइसी नदी में सिराती रहींनदी बड़ी रोमांचित, बड़ी गर्वीली होअपने भीतरसब कुछ समेट लेतीहरियाली भरेउसके किनारेउगाते रहे निरंतर वरदान कभी-कभी असमय छितराए प्राणों के,फूलों के स्पर्शनदी को भावुक कर जाते पर नदी बहती रहीउसकी आत्मा हमेशा ही धरती रहीबस्ती के हर छोर कोनदी का प्यार मिलता रहा सुख-दुख की गवाह रही नदी...कुछ दिनों से बस्ती मेंआस्थाओं और विश्वासों परबहस जारी हैकभी-कभी नदीचारों ओर से अकेली हो जाती हैनदी को हर शामइंतजार रहता दीपों काकोई कहतानदी सूख रही हैभीतर सेसुनकर यहपिघलता है हिमालयऔर नदी मेंबाढ़ आ जाती है फिरउसकी बूँदें नर्तनऔर उसका संगीतबहाव पा जाता हैकिनारे गीत गाते हैंगागर भर-भर ले जाती हैं बस्तियाँ नदी कभी नहीं सूखती!

नदी कभी नहीं सूखती | दामोदर खड़से पौ फटने से पहलेसारी बस्ती हीगागर भर-भरकरअपनी प्यासबुझाती रहीफिर भीनदी कुँवारी ही रहीक्योंकि,नदी कभी नहीं सूखती नदी, इस बस्ती की पूर्वज है!पीढ़ियों के पुरखेइसी नदी मेंडुबकियाँ लगाकरअपना यौवनजगाते रहेसूर्योदय से पहलेसतह पर उभरे कोहरे मेंअंजुरी भर अनिष्ट अँधेरानदी में बहाते रहेहर शामबस्ती की स्त्रियाँअपनी मन्नतों के दीयेइसी नदी में सिराती रहींनदी बड़ी रोमांचित, बड़ी गर्वीली होअपने भीतरसब कुछ समेट लेतीहरियाली भरेउसके किनारेउगाते रहे निरंतर वरदान कभी-कभी असमय छितराए प्राणों के,फूलों के स्पर्शनदी को भावुक कर जाते पर नदी बहती रहीउसकी आत्मा हमेशा ही धरती रहीबस्ती के हर छोर कोनदी का प्यार मिलता रहा सुख-दुख की गवाह रही नदी...कुछ दिनों से बस्ती मेंआस्थाओं और विश्वासों परबहस जारी हैकभी-कभी नदीचारों ओर से अकेली हो जाती हैनदी को हर शामइंतजार रहता दीपों काकोई कहतानदी सूख रही हैभीतर सेसुनकर यहपिघलता है हिमालयऔर नदी मेंबाढ़ आ जाती है फिरउसकी बूँदें नर्तनऔर उसका संगीतबहाव पा जाता हैकिनारे गीत गाते हैंगागर भर-भर ले जाती हैं बस्तियाँ नदी कभी नहीं सूखती!

NOW PLAYING

Nadi Kabhi Nahi Sookhti | Damodar Khadse

0:00 3:31

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

Frequently Asked Questions

How long is this episode of Pratidin Ek Kavita?

This episode is 3 minutes long.

When was this Pratidin Ek Kavita episode published?

This episode was published on April 10, 2024.

What is this episode about?

नदी कभी नहीं सूखती | दामोदर खड़से पौ फटने से पहलेसारी बस्ती हीगागर भर-भरकरअपनी प्यासबुझाती रहीफिर भीनदी कुँवारी ही रहीक्योंकि,नदी कभी नहीं सूखती नदी, इस बस्ती की पूर्वज है!पीढ़ियों के पुरखेइसी नदी मेंडुबकियाँ लगाकरअपना यौवनजगाते रहेसूर्योदय से...

Is there a transcript available for this episode?

Yes, a full transcript is available for this episode. You can read the complete transcript on the episode page.

Can I download this Pratidin Ek Kavita episode?

Yes, you can download this episode by clicking the download button on the episode player, or subscribe to the podcast in your preferred podcast app for automatic downloads.
URL copied to clipboard!