Nukta-Chi Hai | Mirza Ghalib episode artwork

EPISODE · Dec 27, 2025 · 2 MIN

Nukta-Chi Hai | Mirza Ghalib

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

नुक्ता-चीं है।  मिर्ज़ा ग़ालिबनुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बनेक्या बने बात जहाँ बात बनाए न बनेमैं बुलाता तो हूँ उस को मगर ऐ जज़्बा-ए-दिलउस पे बन जाए कुछ ऐसी कि बिन आए न बनेखेल समझा है कहीं छोड़ न दे भूल न जाएकाश यूँ भी हो कि बिन मेरे सताए न बनेग़ैर फिरता है लिए यूँ तिरे ख़त को कि अगरकोई पूछे कि ये क्या है तो छुपाए न बनेइस नज़ाकत का बुरा हो वो भले हैं तो क्याहाथ आवें तो उन्हें हाथ लगाए न बनेकह सके कौन कि ये जल्वागरी किस की हैपर्दा छोड़ा है वो उस ने कि उठाए न बनेमौत की राह न देखूँ कि बिन आए न रहेतुम को चाहूँ कि न आओ तो बुलाए न बनेबोझ वो सर से गिरा है कि उठाए न उठेकाम वो आन पड़ा है कि बनाए न बनेइश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

नुक्ता-चीं है।  मिर्ज़ा ग़ालिबनुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बनेक्या बने बात जहाँ बात बनाए न बनेमैं बुलाता तो हूँ उस को मगर ऐ जज़्बा-ए-दिलउस पे बन जाए कुछ ऐसी कि बिन आए न बनेखेल समझा है कहीं छोड़ न दे भूल न जाएकाश यूँ भी हो कि बिन मेरे सताए न बनेग़ैर फिरता है लिए यूँ तिरे ख़त को कि अगरकोई पूछे कि ये क्या है तो छुपाए न बनेइस नज़ाकत का बुरा हो वो भले हैं तो क्याहाथ आवें तो उन्हें हाथ लगाए न बनेकह सके कौन कि ये जल्वागरी किस की हैपर्दा छोड़ा है वो उस ने कि उठाए न बनेमौत की राह न देखूँ कि बिन आए न रहेतुम को चाहूँ कि न आओ तो बुलाए न बनेबोझ वो सर से गिरा है कि उठाए न उठेकाम वो आन पड़ा है कि बनाए न बनेइश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

NOW PLAYING

Nukta-Chi Hai | Mirza Ghalib

0:00 2:31

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

Frequently Asked Questions

How long is this episode of Pratidin Ek Kavita?

This episode is 2 minutes long.

When was this Pratidin Ek Kavita episode published?

This episode was published on December 27, 2025.

What is this episode about?

नुक्ता-चीं है।  मिर्ज़ा ग़ालिबनुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बनेक्या बने बात जहाँ बात बनाए न बनेमैं बुलाता तो हूँ उस को मगर ऐ जज़्बा-ए-दिलउस पे बन जाए कुछ ऐसी कि बिन आए न बनेखेल समझा है कहीं छोड़ न दे भूल न जाएकाश यूँ भी हो कि बिन मेरे सताए न...

Is there a transcript available for this episode?

Yes, a full transcript is available for this episode. You can read the complete transcript on the episode page.

Can I download this Pratidin Ek Kavita episode?

Yes, you can download this episode by clicking the download button on the episode player, or subscribe to the podcast in your preferred podcast app for automatic downloads.
URL copied to clipboard!