EPISODE · Aug 17, 2023 · 2 MIN
Postcard | Ramdarash Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
पोस्टकार्ड | रामदरश मिश्र चिट्ठी तो मैं भी हूँ परंतु वह सभ्य क़ीमती लिफ़ाफ़ा नहीं जो अपने भीतर न जाने क्या-क्या छिपाये रहता है और उसे दुनिया की नज़रों से बचाकर छोड़ आता है किसी हाथ के एकांत में मैं तो खुला हुआ सस्ता-सा पोस्टकार्ड हूँ और ढोता रहता हूँ मोटी खुरदरी अँगुलियों के सुख-दुख जिन्हें यहाँ-वहाँ कोई भी बाँच सकता हैऔर स्पंदित होकर महसूस कर सकता है किअरे यह चिट्ठी तो उसी की हैलेटरबक्स में जब लिफ़ाफ़े एक-दूसरे से मुँह फेरे अपने में बन्द पड़े होते हैं तब हम पोस्टकार्ड एक-दूसरे से बतियाते रहते हैं आते-जाते रहते हैं एक-दूसरे में और हर एक को लगता है कि वह अकेला न रहकर चिट्ठियों का कारवाँ बन गया है।
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Postcard | Ramdarash Mishra
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