EPISODE · Jun 8, 2023 · 2 MIN
Prem Ki Jagah Anishchit Hai | Vinod Kumar Shukla
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
प्रेम की जगह अनिश्चित है - विनोद कुमार शुक्लप्रेम की जगह अनिश्चित हैयहाँ कोई नहीं होगा की जगह भी नहीं है।आड़ की ओट में होता हैकि अब कोई नहीं देखेगापर सबके हिस्से का एकांतऔर सबके हिस्से की ओट निश्चित है।वहाँ बहुत दोपहर में भीथोड़ा-सा अंधेरा हैजैसे बदली छाई होबल्कि रात हो रही हैऔर रात हो गई हो।बहुत अंधेरे के ज्यादा अंधेरे मेंप्रेम के सुख मेंपलक मूंद लेने का अंधकार हैअपने हिस्से की आड़ मेंअचानक स्पर्श करतेउपस्थित हुएऔर स्पर्श करते, हुए बिदा।
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प्रेम की जगह अनिश्चित है - विनोद कुमार शुक्लप्रेम की जगह अनिश्चित हैयहाँ कोई नहीं होगा की जगह भी नहीं है।आड़ की ओट में होता हैकि अब कोई नहीं देखेगापर सबके हिस्से का एकांतऔर सबके हिस्से की ओट निश्चित है।वहाँ बहुत दोपहर में भीथोड़ा-सा अंधेरा हैजैसे बदली छाई होबल्कि रात हो रही हैऔर रात हो गई हो।बहुत अंधेरे के ज्यादा अंधेरे मेंप्रेम के सुख मेंपलक मूंद लेने का अंधकार हैअपने हिस्से की आड़ मेंअचानक स्पर्श करतेउपस्थित हुएऔर स्पर्श करते, हुए बिदा।
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