EPISODE · Jan 26, 2024 · 1 MIN
Pushp Ki Abhilasha | Makhanlal Chaturvedi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
पुष्प की अभिलाषा - माखनलाल चतुर्वेदीचाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ। चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ॥ चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ। चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ॥ मुझे तोड़ लेना वनमाली। उस पथ में देना तुम फेंक॥ मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने। जिस पथ जावें वीर अनेक॥
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पुष्प की अभिलाषा - माखनलाल चतुर्वेदीचाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ। चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ॥ चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ। चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ॥ मुझे तोड़ लेना वनमाली। उस पथ में देना तुम फेंक॥ मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने। जिस पथ जावें वीर अनेक॥
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