EPISODE · Dec 1, 2023 · 2 MIN
Pustakein | Vishwanath Prasad Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
पुस्तकें | विश्वनाथ प्रसाद तिवारीनहीं, इस कमरे में नहीं उधर उस सीढ़ी के नीचे उस गैरेज के कोने में ले जाओपुस्तकें वहाँ नहीं, जहाँ अँट सकती फ्रिज जहाँ नहीं लग सकता आदमकद शीशाबोरी में बाँधकर चट्टी से ढककर कुछ तख्ते के नीचे कुछ फूटे गमलों के ऊपर रख दो पुस्तकेंले जाओ इन्हें तक्षशिला-विक्रमशिला या चाहे जहाँ हमें उत्तराधिकार में नहीं चाहिए पुस्तकें कोई झपटेगा पासबुक पर कोई ढूँढ़ेगा लॉकर की चाभी किसी की आँखों में चमकेंगे खेत किसी में गड़े हुए सिक्के हाय-हाय, समय बूढ़ी दादी-सी उदास हो जाएँगी पुस्तकेंपुस्तकों !जहाँ भी रख दें वे पड़ी रहना इंतजार मेंआएगा कोई न कोई दिग्भ्रमित बालक ज़रूर किसी शताब्दी में अँधेरे में टटोलता अपनी राहस्पर्श से पहचान लेना उसे आहिस्ते-आहिस्ते खोलना अपना हृदयजिसमें सोया है अनंत समय और थका हुआ सत्य दबा हुआ गुस्सा और गूँगा प्यार दुश्मनों के जासूस पकड़ नहीं सके जिसे ।
What this episode covers
पुस्तकें | विश्वनाथ प्रसाद तिवारीनहीं, इस कमरे में नहीं उधर उस सीढ़ी के नीचे उस गैरेज के कोने में ले जाओपुस्तकें वहाँ नहीं, जहाँ अँट सकती फ्रिज जहाँ नहीं लग सकता आदमकद शीशाबोरी में बाँधकर चट्टी से ढककर कुछ तख्ते के नीचे कुछ फूटे गमलों के ऊपर रख दो पुस्तकेंले जाओ इन्हें तक्षशिला-विक्रमशिला या चाहे जहाँ हमें उत्तराधिकार में नहीं चाहिए पुस्तकें कोई झपटेगा पासबुक पर कोई ढूँढ़ेगा लॉकर की चाभी किसी की आँखों में चमकेंगे खेत किसी में गड़े हुए सिक्के हाय-हाय, समय बूढ़ी दादी-सी उदास हो जाएँगी पुस्तकेंपुस्तकों !जहाँ भी रख दें वे पड़ी रहना इंतजार मेंआएगा कोई न कोई दिग्भ्रमित बालक ज़रूर किसी शताब्दी में अँधेरे में टटोलता अपनी राहस्पर्श से पहचान लेना उसे आहिस्ते-आहिस्ते खोलना अपना हृदयजिसमें सोया है अनंत समय और थका हुआ सत्य दबा हुआ गुस्सा और गूँगा प्यार दुश्मनों के जासूस पकड़ नहीं सके जिसे ।
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Pustakein | Vishwanath Prasad Tiwari
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