EPISODE · Apr 4, 2025 · 1 MIN
Rachta Vriksh | Raghuvir Sahay
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
रचता वृक्ष | रघुवीर सहाय देखो वक्ष को देखो वह कुछ कर रहा है।किताबी होगा कवि जो कहेगा कि हाय पत्ता झर रहा हैरूखे मुँह से रचता है वृक्ष जब वह सूखे पत्ते गिराता हैऐसे कि ठीक जगह जाकर गिरें धूप में छाँह मेंठीक-ठीक जानता है वह उस अल्पना का रूपचलती सड़क के किनारे जिसे आँकेगाऔर जो परिवर्तन उसमें हवा करेउससे उदासीन है।
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रचता वृक्ष | रघुवीर सहाय देखो वक्ष को देखो वह कुछ कर रहा है।किताबी होगा कवि जो कहेगा कि हाय पत्ता झर रहा हैरूखे मुँह से रचता है वृक्ष जब वह सूखे पत्ते गिराता हैऐसे कि ठीक जगह जाकर गिरें धूप में छाँह मेंठीक-ठीक जानता है वह उस अल्पना का रूपचलती सड़क के किनारे जिसे आँकेगाऔर जो परिवर्तन उसमें हवा करेउससे उदासीन है।
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