EPISODE · Nov 5, 2021 · 6 MIN
ऋग्वेद मण्डल 1. सूक्त 3. मंत्र 1 - यह मंत्र वे लोग अवश्य सुनें जिन्हें लगता है कि वेद में विज्ञान नहीं है
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अश्वि॑ना॒ यज्व॑री॒रिषो॒ द्रव॑त्पाणी॒ शुभ॑स्पती। पुरु॑भुजा चन॒स्यत॑म्॥ - ऋग्वेद (1.3.1) पदार्थ - हे विद्या के चाहनेवाले मनुष्यो ! तुम लोग (द्रवत्पाणी) शीघ्र वेग का निमित्त पदार्थविद्या के व्यवहारसिद्धि करने में उत्तम हेतु (शुभस्पती) शुभ गुणों के प्रकाश को पालने और (पुरुभुजा) अनेक खाने-पीने के पदार्थों के देने में उत्तम हेतु (अश्विना) अर्थात् जल और अग्नि तथा (यज्वरीः) शिल्पविद्या का सम्बन्ध करानेवाली (इषः) अपनी चाही हुई अन्न आदि पदार्थों की देनेवाली कारीगरी की क्रियाओं को (चनस्यतम्) अन्न के समान अति प्रीति से सेवन किया करो। ------------------------------------------------------------ (भाष्यकार - स्वामी दयानंद सरस्वती जी) (सविनय आभार: www.vedicscriptures.in) -------------------------------------------------------------- हमारे पॉडकास्ट का अनुसरण करें: Spotify - https://spoti.fi/3sCWtJw Google podcast - https://bit.ly/3dU7jXO Apple podcast - https://apple.co/3dStOfy Whatsapp पर प्रतिदिन पॉडकास्ट के एपिसोड प्राप्त करें: https://bit.ly/3srBbPu ------------------------------------------------------------ वेद प्रचार के इस पुण्य कार्य में आर्थिक सहयोग करें: UPI Transfer : madhavdas@kotak Google Pay : mdas.vc-3@okhdfcbank ------------------------------------------- हमसे संपर्क करें: [email protected] ---------------------------------------------
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