EPISODE · Nov 25, 2021 · 5 MIN
ऋग्वेद मण्डल 1. सूक्त 4. मंत्र 9 - क्या सफलता केवल पुरुषार्थ द्वारा संभव है?
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तं त्वा॒ वाजे॑षु वा॒जिनं॑ वा॒जया॑मः शतक्रतो। धना॑नामिन्द्र सा॒तये॑॥ - ऋग्वेद (1.4.9) पदार्थ - हे (शतक्रतो) असंख्यात वस्तुओं में विज्ञान रखनेवाले (इन्द्र) परम ऐश्वर्य्यवान् जगदीश्वर ! हम लोग (धनानाम्) पूर्ण विद्या और राज्य को सिद्ध करनेवाले पदार्थों का (सातये) सुखभोग वा अच्छे प्रकार सेवन करने के लिये (वाजेषु) युद्धादि व्यवहारों में (वाजिनम्) विजय करानेवाले और (तम्) उक्त गुणयुक्त (त्वा) आपको ही (वाजयामः) नित्य प्रति जानने और जनाने का प्रयत्न करते हैं॥ ------------------------------------------------------------ (भाष्यकार - स्वामी दयानंद सरस्वती जी) (सविनय आभार: www.vedicscriptures.in) -------------------------------------------------------------- हमारे पॉडकास्ट का अनुसरण करें: Spotify - https://spoti.fi/3sCWtJw Google podcast - https://bit.ly/3dU7jXO Apple podcast - https://apple.co/3dStOfy Whatsapp पर प्रतिदिन पॉडकास्ट के एपिसोड प्राप्त करें: https://chat.whatsapp.com/IrQUAuWQ2410v2DWZ68hPU ------------------------------------------- हमसे संपर्क करें: [email protected] --------------------------------------------
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