EPISODE · Dec 26, 2021 · 8 MIN
ऋग्वेद मण्डल 1. सूक्त 7. मंत्र 10 - ईश्वर के स्थान पर काल्पनिक व्यक्तित्व को पूजना ईश्वर का अपमान है
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इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः। अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः॥ - ऋग्वेद (1.7.10) पदार्थ - हम लोग जिस (विश्वतः) सब पदार्थों वा (जनेभ्यः) सब प्राणियों से (परि) उत्तम-उत्तम गुणों करके श्रेष्ठतर (इन्द्रम्) पृथिवी में राज्य देनेवाले परमेश्वर का (हवामहे) वार-वार अपने हृदय में स्मरण करते हैं, वही परमेश्वर (वः) हे मित्र लोगो ! तुम्हारे और हमारे पूजा करने योग्य इष्टदेव (केवलः) चेतनमात्र स्वरूप एक ही है॥ ------------------------------------------------------------ (भाष्यकार - स्वामी दयानंद सरस्वती जी) (सविनय आभार: www.vedicscriptures.in) -------------------------------------------------------------- हमारे पॉडकास्ट का अनुसरण करें: Spotify - https://spoti.fi/3sCWtJw Google podcast - https://bit.ly/3dU7jXO Apple podcast - https://apple.co/3dStOfy Whatsapp पर प्रतिदिन पॉडकास्ट के एपिसोड प्राप्त करें: https://chat.whatsapp.com/CYWFBJR4ZId7tLCE1AKxwc Telegram पर प्रतिदिन पॉडकास्ट के एपिसोड प्राप्त करें: https://t.me/+yqO2v2CET0o1OGRl ------------------------------------------- हमसे संपर्क करें: [email protected] --------------------------------------------
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