EPISODE · Jun 9, 2024 · 1 MIN
Rin Phoolon Sa | Sunita Jain
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ऋण फूलों-सा | सुनीता जैनइस काया कोजिस माया नेजन्म दिया,वह माँग रही-किजैसे उत्सव के बाददीवारों परहाथों के थापे रह जातेजैसे पूजा के बादचौरे के आसपासपैरों के छापे रह जातेजैसे वृक्षों परप्रेम संदेशों के बँधे,बँधे धागे रह जाते,वैसा ही कुछकर जाऊँसोच रही,माया के धीरज काकाया की कथरी कायह ऋणफूलों-सा हल्का-किन शब्दों मेंतोल,चुकाऊँ
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Rin Phoolon Sa | Sunita Jain
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